कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की राज्य अध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट किया कि 3 जून 2026 को उन्हें राज्य अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन अब वह इस पद सहित पार्टी के सभी दायित्वों से स्वयं को अलग कर रही हैं।
त्यागपत्र में क्या कहा
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने इस्तीफे में लिखा कि उनके हस्ताक्षर से अब तक जारी सभी संगठनात्मक आदेश निरस्त माने जाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब वह निर्वाचन आयोग के समक्ष तृणमूल कांग्रेस की अधिकृत प्रतिनिधि नहीं रहेंगी।
ममता बनर्जी की करीबी मानी जाती हैं
चंद्रिमा भट्टाचार्य को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। वह पश्चिम बंगाल सरकार में वित्त, स्वास्थ्य, भूमि सुधार और शरणार्थी पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। पेशे से अधिवक्ता रहीं चंद्रिमा ने 2011 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और दमदम विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गईं।
पार्टी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान
टीएमसी के भीतर संगठनात्मक विवाद लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ा है और बागी गुट ने अलग पहचान का दावा करते हुए लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग की है। साथ ही, बागी नेताओं ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर भी दावा पेश किया है।
रिपोर्टों के अनुसार, बागी गुट के नेताओं ने कोलकाता स्थित पार्टी कार्यालय में बैठक कर स्वयं को “असली तृणमूल कांग्रेस” का प्रतिनिधि बताया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में टीएमसी के भीतर जारी नेतृत्व संघर्ष और तेज हो गया है।
