नई दिल्ली : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलावों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधारों को स्वीकार करने से बच रही है और चुनिंदा आंकड़ों के आधार पर अधूरी तस्वीर पेश कर रही है।
जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि एनएफएचएस-3 (2005-06) की तुलना में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण संकेतकों में बड़ा सुधार दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 43.9 से बढ़कर 76.2 हो गया है। वहीं संस्थागत प्रसव 38.7 प्रतिशत से बढ़कर 90.6 प्रतिशत और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में होने वाले प्रसव 46.6 प्रतिशत से बढ़कर 91.3 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं।
नड्डा ने कहा कि ये आंकड़े केवल सांख्यिकीय उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि करोड़ों महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित प्रसव और समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने का प्रमाण हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में निरंतर सुधार हुआ है और इसकी वास्तविक तस्वीर प्रगति एवं विकास की कहानी बयां करती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दशकों तक देश कमजोर स्वास्थ्य ढांचे, सीमित चिकित्सा सुविधाओं और कमजोर सेवा वितरण प्रणाली जैसी चुनौतियों से जूझता रहा, लेकिन अब स्थिति में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ी है, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं और सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी विस्तृत हुआ है।
उन्होंने बताया कि पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 87.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि स्वास्थ्य बीमा कवरेज 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 60.2 प्रतिशत हो गया है। इसके अलावा महिलाओं द्वारा स्वच्छ मासिक धर्म सुरक्षा साधनों के उपयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह आंकड़ा 79.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
नड्डा ने यह भी कहा कि बच्चों में कुपोषण से जुड़ी स्टंटिंग की दर 48 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत हो गई है। उनके अनुसार यह स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और जनकल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन केंद्र सरकार उन्हें दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में हुई प्रगति को नकारना उन लाखों आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्यकर्मियों और लाभार्थियों के योगदान को नजरअंदाज करने जैसा है, जिन्होंने इस बदलाव को संभव बनाया है।
