रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने लद्दाख के शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आमरण अनशन स्थल से हटाए जाने की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें सफेद चादर की आड़ में जिस तरह ले जाया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
शनिवार को रांची स्थित झामुमो के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यदि सरकार को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की वास्तविक चिंता थी, तो अनशन के शुरुआती दिनों में कोई पहल क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अचानक बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में की गई कार्रवाई कई सवाल खड़े करती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक को जिस तरह सफेद चादर से ढंककर अनशन स्थल से हटाया गया, वह लोकतंत्र की गरिमा और नागरिक अधिकारों के सम्मान के अनुरूप नहीं था। उनके अनुसार यह कार्रवाई अनावश्यक और आपत्तिजनक थी।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर असहमति की आवाजों को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि झामुमो लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष जारी रखेगा और किसी भी चुनौती का मजबूती से सामना करेगा।


