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दुकान में बरकत के लिए करें इन मंत्रों का जप, कारोबार में आएगी सकारात्मक ऊर्जा

हर व्यापारी चाहता है कि उसकी दुकान या कारोबार में लगातार उन्नति हो, ग्राहकों की संख्या बढ़े और धन-धान्य की कभी कमी न रहे। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि दुकान खोलने से लेकर बंद करने तक कुछ विशेष मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप किया जाए, तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और व्यापार में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं। आइए जानते हैं किस समय कौन-सा मंत्र जपना शुभ माना गया है।

दुकान खोलते समय करें इस मंत्र का जप

सुबह दुकान खोलने से पहले इस मंत्र का कम से कम 9 या 21 बार जप करें—

ॐ ह्रीं अर्हं नमो अक्खीण-महानसं झों झों नमः।

इसके बाद माता लक्ष्मी का ध्यान करते हुए यह मंत्र भी जपें—

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

मान्यता है कि इन मंत्रों के जप से धन की स्थिरता बनी रहती है और दुकान में सकारात्मक वातावरण का संचार होता है।

पहली बिक्री (बोहनी) के समय करें गणेश मंत्र का जप

दिन की पहली बिक्री होने पर सबसे पहले प्राप्त धन को अपने माथे से लगाएं और फिर यह मंत्र 1 या 3 बार बोलें—

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

मान्यता है कि इससे पूरे दिन व्यापार में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और ग्राहकों का सहयोग मिलता है।

व्यापार में वृद्धि के लिए लक्ष्मी-नारायण मंत्र

यदि कारोबार में लगातार रुकावटें आ रही हों, तो प्रतिदिन दुकान की पूजा के बाद अपनी सीट पर बैठकर 11 या 21 बार इस मंत्र का जप करें—

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं लक्ष्मी नारायणाय नमो नमः।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र के जप से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और व्यापार में स्थिरता आती है।

शाम को दीपक या लाइट जलाते समय बोलें यह मंत्र

दुकान में शाम को दीपक या लाइट जलाते समय यह मंत्र बोलें—

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यं धनसंपदा।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यापार में सकारात्मक माहौल बना रहता है।

दुकान बंद करते समय करें इस मंत्र का जप

दुकान बंद करने से पहले शटर गिराने के ठीक पहले यह मंत्र 7 बार जपें—

ॐ दक्षिण भैरवाय भूत-प्रेत बन्ध, तन्त्र-बन्ध, निग्रहणी, सर्व शत्रु संहारिणी कार्य सिद्ध कुरु कुरु स्वाहा।

मान्यता है कि यह मंत्र दुकान को नकारात्मक शक्तियों, बुरी नजर और बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करता है। यदि संभव हो तो मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक भी जलाएं।

श्रद्धा और नियम का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन मंत्रों का प्रभाव तभी माना जाता है जब उनका जप पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और नियमित रूप से किया जाए। इन्हें आध्यात्मिक आस्था का हिस्सा माना जाता है और इन्हें किसी निश्चित परिणाम की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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