पश्चिमी सिंहभूम। जिले को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य के साथ सुरक्षा एजेंसियों ने अभियान को निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिरीक्षक साकेत कुमार सिंह और विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के महानिरीक्षक अनूप बिरथरे जिला मुख्यालय चाईबासा पहुंचे। यहां ऑपरेशन ‘मेघाबुरु’ के तहत चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा और आगामी निर्णायक कार्रवाई की रणनीति तय करने के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है।
दरअसल, हाल के दिनों में सारंडा के घने जंगलों में हुई बड़ी मुठभेड़ को सुरक्षा बलों की अहम सफलता माना जा रहा है, जिसमें 17 नक्सलियों को मार गिराया गया था। इस मुठभेड़ में आनंद जैसे कुख्यात माओवादी नेता के मारे जाने से संगठन को बड़ा झटका लगा है। इसके बाद संकेत मिले हैं कि सारंडा, पोड़ाहाट और आसपास के दुर्गम वन क्षेत्रों में भी इसी तरह के बड़े और निर्णायक ऑपरेशन लगातार चलाए जाएंगे, जिससे कि नक्सलियों की बची-खुची ताकत को भी पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार, सारंडा के जंगलों में अब भी कई बड़े माओवादी नेता सक्रिय हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के इनामी मिसिर बेसरा जैसे कुख्यात नक्सली शामिल बताए जाते हैं। ऐसे में निर्धारित समय-सीमा के भीतर पश्चिमी सिंहभूम को नक्सल मुक्त करना सुरक्षा बलों के लिए एक कठिन, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्य बना हुआ है।
इस दौरान सीआरपीएफ आईजी साकेत कुमार सिंह और एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे के हेलीकॉप्टर से चाईबासा पहुंचने पर टाटा कॉलेज मैदान में कोल्हान पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अनुरंजन किस्पोट्टा और पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित रेणु ने उनका स्वागत किया। इसके बाद ऑपरेशन मेघाबुरु और जिले में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों को लेकर बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ।
प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि आने वाले दिनों में नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज की जाएगी, जिससे कि क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और सामान्य जनजीवन की बहाली सुनिश्चित की जा सके।
