रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस देखने को मिली। सत्ता पक्ष के विधायकों ने सरकार की नीतियों का बचाव करते हुए विपक्ष पर जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक सुरेश पासवान ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने से जनता की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार नाम परिवर्तन की राजनीति कर रही है, जबकि जनता को रोजगार, विकास और बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता है।
उन्होंने मनरेगा कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार, सरकार को रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
राजद विधायक सुरेश पासवान ने संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी जमीन के मुद्दे को उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में आदिवासियों के हितों की अनदेखी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान झारखंड सरकार गरीबों और आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उस पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।
इस दौरान कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने महत्वपूर्ण चर्चा के समय विपक्ष के कई सदस्यों की अनुपस्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विधानसभा की गंभीर चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। सत्ता पक्ष ने सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को प्रमुखता से रखा, जबकि विपक्ष ने सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
