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झारखंड विधानसभा में विधायक सीपी सिंह ने उठाया आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति का मामला

रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को स्वास्थ्य सेवाओं और खनन प्रभावित रैयतों के मुआवजे का मुद्दा विपक्ष की ओर से जोरदार तरीके से उठाया गया।

आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति को लेकर सदन में विधायक सीपी सिंह और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, वहीं विधायक जनार्दन पासवान ने खनन प्रभावित रैयतों को मुआवजा मिलने तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की।

सदन में प्रश्न उठाते हुए सीपी सिंह ने कहा कि राज्य के आयुष चिकित्सालयों में कुल 670 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 48 आयुष चिकित्सक ही कार्यरत हैं। उन्होंने आयुष निदेशालय के गठन और रिक्त पदों पर नियुक्ति में हो रही देरी पर सरकार से जवाब मांगा।

इस पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसके लिए झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) को अधियाचना भेजी जा चुकी है।

मंत्री के जवाब पर तंज कसते हुए सीपी सिंह ने कहा कि वर्ष 2022 में ही नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।

इस पर मंत्री इरफान अंसारी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि सात मार्च तक नियुक्ति का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा और जल्द ही बहाली प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

विधानसभा के शून्यकाल के दौरान विधायक जनार्दन पासवान ने खनन परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों के लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई रैयतों को अब तक उचित और पूर्ण मुआवजा नहीं मिला है, जिससे उनमें असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जब तक प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक एनटीपीसी और अडानी समूह की खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जानी चाहिए।

जनार्दन पासवान ने कहा कि जमीन ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार है और मुआवजा नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिला प्रशासन, कंपनियों और प्रभावित रैयतों के बीच संयुक्त बैठक कर पारदर्शी और सहमति आधारित समाधान निकाला जाए।

सदन में उठे इन दोनों मुद्दों ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और खनन प्रभावित लोगों के अधिकारों को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष ने नियुक्तियों में देरी और मुआवजा भुगतान में लापरवाही को गंभीर विषय बताते हुए जल्द समाधान की मांग की है।-

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