मुंबई : मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष और सांसद वर्षा गायकवाड़ ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा पर ‘नारी वंदना’ के मुखौटे में राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सरकार में हिम्मत है, तो 2023 में मंजूर हो चुके महिला आरक्षण को बिना किसी देरी के तुरंत लागू करे।
‘नारी शक्ति’ के नाम पर ‘परिसीमन’ का खेल
वर्षा गायकवाड़ ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि महिला आरक्षण को परिसीमन (De-limitation) से जोड़ना एक सोची-समझी साजिश है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
उत्तर बनाम दक्षिण: परिसीमन के जरिए हिंदी बेल्ट में 133 सीटें बढ़ जाएंगी, जबकि पूरे दक्षिण भारत में केवल 44 सीटें बढ़ेंगी। इससे दक्षिण का राजनीतिक प्रभाव कम होगा।
संसदीय ढांचे से खिलवाड़: गायकवाड़ के अनुसार, यह महिलाओं के प्रतिनिधित्व का प्रस्ताव नहीं, बल्कि चुनाव क्षेत्रों को असंगठित कर लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है।
राज्यों को नुकसान: इस फॉर्मूले से गोवा जैसे छोटे राज्यों को अपनी सीटें गंवानी पड़ सकती हैं और उत्तर-पूर्व भारत का प्रतिनिधित्व भी घट जाएगा।
आंकड़ों के जरिए भाजपा की घेराबंदी
सांसद ने स्पष्ट किया कि भाजपा का गणित केवल चुनाव जीतने के लिए है:
हिंदी बेल्ट: इनका हिस्सा 33% से बढ़कर 38% हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश: अकेले यूपी को 58 नई सीटें मिलेंगी, जो दक्षिण भारत के पांचों राज्यों की कुल बढ़ोत्तरी से भी ज्यादा है।
आरक्षण का सच: वर्तमान 543 सीटों पर ही अगर कानून लागू हो, तो महिलाओं को 181 सीटें मिल सकती हैं, लेकिन सरकार इसे भविष्य पर टाल रही है।
OBC कोटा और खोखले वादे
गायकवाड़ ने जोर देकर कहा कि OBC सब-कोटा के बिना महिला आरक्षण पूरी तरह से अधूरा और खोखला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ने महिला आरक्षण बिल नहीं, बल्कि ‘कॉन्स्टिट्यूएंसी रीऑर्गेनाइजेशन बिल’ पेश किया था, जिसे इंडिया (INDIA) गठबंधन ने बेनकाब कर दिया है।
सीधा सवाल: “2023 में जब बिल एकमत से पास होकर कानून बन चुका है, तो उसे लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना का बहाना क्यों बनाया जा रहा है?”
