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सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निपाह वायरस को लेकर सतर्क रहने के निर्देश

रांची। स्वास्थ्य मंत्री की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि निपाह वायरस एक अत्यंत खतरनाक ज़ूनोटिक बीमारी है, जो जानवरों से मनुष्यों में फैलती है। यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों (फ्रूट बैट) से फैलता है। इसके अलावा संक्रमित जानवरों, विशेषकर सूअरों के सीधे संपर्क, उनके संक्रमित मांस के सेवन अथवा संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले लार, रक्त और अन्य द्रवों के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है। डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य के सभी जिलों में सख्त निगरानी, त्वरित रिपोर्टिंग प्रणाली और जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं, ताकि लोगों को निपाह वायरस के लक्षण, बचाव और आवश्यक सावधानियों की पूरी जानकारी मिल सके और राज्य में इसके किसी भी संभावित प्रकोप को रोका जा सके। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार इस खतरनाक बीमारी की रोकथाम के लिए पूरी तरह मुस्तैद है और स्वास्थ्य विभाग को हर स्तर पर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। विज्ञप्ति में बताया गया है कि निपाह वायरस की मृत्यु दर (फैटेलिटी रेट) काफी अधिक होती है, जो प्रकोप की गंभीरता के अनुसार 40 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक हो सकती है। इसी कारण इसे एक अत्यंत गंभीर और घातक रोग माना जाता है। निपाह वायरस के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, मानसिक भ्रम, मस्तिष्क पर गंभीर प्रभाव (एन्सेफेलाइटिस) और कोमा जैसी गंभीर स्थितियां शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो संदिग्ध मामलों के सामने आने के बाद झारखंड सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

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