लोहरदगा। रविवार को लोहरदगा में एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। लोहरदगा–रांची–टोरी रेलखंड पर कोयल नदी पर बने रेलवे पुल संख्या 115 के क्षतिग्रस्त पिलरों से राजधानी एक्सप्रेस, सासाराम एक्सप्रेस और लोहरदगा–रांची मेमू पैसेंजर गुजर गईं। गनीमत रही कि इस दौरान कोई दुर्घटना नहीं हुई और हजारों रेल यात्रियों की जान बच गई। जानकारी के अनुसार, उक्त रेलवे पुल के पिलर संख्या 5 में पहले से ही आंशिक दरार थी, जिसकी मरम्मत का कार्य चल रहा था। इसके बावजूद रेलवे ने पुल से ट्रेनों का परिचालन बंद नहीं किया। रविवार को स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब पिलर संख्या 4 में भी दरार आ गई। इसके बाद इंजीनियरिंग स्टाफ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए सुबह 10:10 बजे पुल से ट्रेन परिचालन तत्काल रोक दिया। लापरवाही उजागर, पुल से गुजरती रहीं एक्सप्रेस ट्रेनें बड़ी लापरवाही यह रही कि क्षतिग्रस्त रेलवे पुल से रविवार को रांची–नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस, सासाराम एक्सप्रेस और मेमू पैसेंजर को गुजारा गया। राजधानी एक्सप्रेस सुबह 8:18 बजे लोहरदगा स्टेशन पहुंची और मात्र चार मिनट बाद 8:22 बजे इसी पुल से होते हुए रांची के लिए रवाना हो गई। सासाराम एक्सप्रेस भी 9:21 बजे इसी पुल से होकर गुजरी। इसके बाद निरीक्षण के दौरान पुल की स्थिति को गंभीर मानते हुए रेलवे ने परिचालन रोकने का फैसला लिया। इसी बीच आरएल-3 ट्रेन सुबह 8:55 बजे रांची से लोहरदगा के लिए रवाना हो चुकी थी, जिसे रेलवे पुल से पहले ही रोक दिया गया। अचानक ट्रेन रोके जाने से यात्रियों में हड़कंप मच गया। कई यात्री ट्रेन से उतरकर पैदल ही रेलवे ट्रैक पार कर अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। रेलवे का बड़ा फैसला, कई ट्रेनें रद्द मामले को लेकर रेलवे ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया है। रांची–नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को फिलहाल अपने नियमित मार्ग लोहरदगा के बजाय मेसरा–बरकाकाना–टोरी मार्ग से चलाया जाएगा। 7 जनवरी तक लोहरदगा रेलवे स्टेशन से ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बाधित रहेगा। रांची–सासाराम एक्सप्रेस 5 से 7 जनवरी तक रद्द रहेगी। सासाराम–रांची एक्सप्रेस 6 से 8 जनवरी तक रद्द की गई है। वहीं 5 से 7 जनवरी तक मेमू पैसेंजर को रांची से केवल नगजुआ तक सीमित कर दिया गया है। इस अवधि में लोहरदगा स्टेशन तक कोई भी ट्रेन नहीं आएगी। रेलवे की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि पुल की मरम्मत और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही परिचालन बहाल किया जाएगा। इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
