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रात में सांस फूलना हो सकता है पीएनडी का संकेत, नमक का अधिक सेवन भी बढ़ा सकता है जोखिम

रात में सोते समय अचानक सांस लेने में तकलीफ के कारण हांफते हुए जागना सामान्य समस्या नहीं है। चिकित्सकीय भाषा में इसे पैरॉक्सिस्मल नॉक्टर्नल डिस्प्निया (पीएनडी) कहा जाता है। यह अक्सर हृदय, फेफड़ों या नींद से जुड़ी गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को राहत पाने के लिए तुरंत बैठना या खड़ा होना पड़ता है।

क्या है पीएनडी?

पीएनडी ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति सोने के एक से तीन घंटे बाद अचानक सांस फूलने, घुटन और बेचैनी के कारण जाग जाता है। बैठने या खड़े होने पर कुछ राहत मिलती है। यह लक्षण अक्सर हार्ट फेलियर, फेफड़ों की बीमारी, स्लीप एपनिया या शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने से जुड़ा होता है।

क्यों होती है यह समस्या?

  • हार्ट फेलियर: हृदय पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता, जिससे लेटने पर तरल पदार्थ फेफड़ों में जमा होने लगता है।
  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया: सोते समय बार-बार सांस रुकने से ऑक्सीजन का स्तर गिरता है।
  • अस्थमा या सीओपीडी: रात में वायुमार्ग संकुचित होने से सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है।
  • फेफड़ों में पानी भरना (पल्मोनरी एडीमा): फेफड़ों में तरल जमा होने से अचानक घुटन महसूस होती है।
  • मोटापा और अधिक नमक का सेवन: अधिक नमक शरीर में पानी रोकता है। यदि पहले से हृदय संबंधी समस्या हो तो इससे फेफड़ों में तरल जमा होने का खतरा बढ़ सकता है और रात में सांस फूलने की शिकायत हो सकती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

  • रात में अचानक हांफते हुए जागना
  • लेटने पर सांस लेने में कठिनाई
  • बैठने पर राहत मिलना
  • सीने में दर्द
  • पैरों में सूजन
  • लगातार थकान
  • बार-बार खांसी या घरघराहट

जांच कैसे होती है?

डॉक्टर जरूरत के अनुसार ईसीजी, ईकोकार्डियोग्राफी, छाती का एक्स-रे, बीएनपी रक्त जांच, फेफड़ों की जांच या स्लीप स्टडी कराने की सलाह दे सकते हैं।

बचाव के उपाय

  • नमक का सेवन सीमित रखें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • हृदय और फेफड़ों की बीमारी का नियमित उपचार कराएं।
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें।
  • चिकित्सक की सलाह के बिना दवाएं बंद न करें।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

यदि रात में बार-बार सांस फूलने के कारण नींद टूटती है, सीने में दर्द होता है, होंठ या उंगलियां नीली पड़ने लगें या सांस लेने में गंभीर तकलीफ हो, तो तुरंत अस्पताल जाएं। यह हृदय या फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।

अस्वीकरण: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। यदि आपको ऐसे लक्षण बार-बार हो रहे हैं, तो स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

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