Homeअन्तर्राष्ट्रीयएक लाख वोटों की सुनामी… फलता में आखिर किसने बदल दिया पूरा...

एक लाख वोटों की सुनामी… फलता में आखिर किसने बदल दिया पूरा खेल?

कोलकाता। चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे “तृणमूल कांग्रेस के पतन की शुरुआत” बताते हुए पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि फलता की जनता ने वर्षों बाद स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान कर लोकतंत्र को पुनर्स्थापित किया है। उपचुनाव के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी जहांगिर खान को लेकर रही। मतदान से दो दिन पहले उन्होंने चुनाव मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रचार के अंतिम दिन भाजपा प्रत्याशी को एक लाख वोटों से जिताने का लक्ष्य रखा था। मतगणना के 18 राउंड तक भाजपा उम्मीदवार करीब 92 हजार वोटों से आगे चल रहे थे, जबकि अंतिम जीत का अंतर एक लाख आठ हजार से अधिक पहुंच गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पिछले लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस को करीब 1.70 लाख वोटों की बढ़त मिली थी, लेकिन इस उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार को महज साढ़े पांच हजार के आसपास वोट मिले। मतदान के दौरान कई बूथों पर तृणमूल कांग्रेस का काेई एजेंट मौजूद नहीं था। वहीं, मतगणना केंद्र में भी पार्टी की सक्रियता बेहद कमजोर दिखाई दी। इस उपचुनाव में वाममोर्चा समर्थित उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी ने लगभग 37 हजार वोट हासिल कर ध्यान खींचा। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला को करीब साढ़े नौ हजार वोट मिले। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के कमजोर पड़ने से राज्य की विपक्षी राजनीति में नई संभावनाएं बन सकती हैं। फलता उपचुनाव की पृष्ठभूमि काफी विवादित रही। विधानसभा चुनाव के दौरान कई बूथों के ईवीएम में इत्र, स्याही और टेप लगाए जाने जैसी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने चुनाव रद्द कर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था। इसी दौरान जहांगिर खान और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अजयपाल शर्मा के बीच तनाव की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों में रहीं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद फलता में तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक सक्रियता लगभग ठप पड़ गई थी। स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से वोट नहीं डाल पाने और “थ्रेट कल्चर” के आरोपों को भाजपा ने चुनावी मुद्दा बनाया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कई जनसभाएं और रोड शो किए, जिनमें भारी भीड़ देखने को मिली। उन्होंने फलता के लिए विशेष विकास पैकेज की भी घोषणा की थी, जिसका असर मतदाताओं पर स्पष्ट दिखाई दिया। चुनाव परिणाम के बाद शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पर लंबा संदेश जारी करते हुए कहा कि फलता की जनता ने लोकतंत्र को फिर से स्थापित किया है। मैं यहां के मतदाताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने भाजपा प्रत्याशी को एक लाख से अधिक वोटों के अंतर से जिताया। विकास के माध्यम से हम इस विश्वास का ऋण चुकाएंगे। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर सरकारी तंत्र के दुरुपयोग, सिंडिकेट राज और डर की राजनीति चलाने का आरोप लगाया। बिना नाम लिए जहांगिर खान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “एक तथाकथित सेनापति ने लोकतंत्र का गला घोंटने में कोई कसर नहीं छोड़ी।” मुख्यमंत्री ने दावा किया कि “15 वर्षों बाद लोगों को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर मिला और असली जनमत सामने आया।” राजनीतिक हलकों में इस जीत को पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का संकेत माना जा रहा है। भाजपा इसे बड़े जनादेश के रूप में पेश कर रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के सामने संगठनात्मक पकड़ बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। गौरतलब है कि, जिस क्षेत्र में टीएमसी को यह करारी हार मिली है, वह डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व लाेकसभा में सांसद हैं। पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट पर हुए पुनर्मतदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। भाजपा प्रत्याशी देबाशीष पांडा ने एक लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। इस परिणाम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments