सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ ग्रहों की शांति के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार यदि व्यक्ति अपनी जन्मकुंडली में चल रही महादशा, अंतर्दशा या गोचर के अनुसार अशुभ ग्रहों की पहचान कर श्रद्धा और विधि से सरल उपाय करता है, तो ग्रहजनित कष्टों की तीव्रता कम हो सकती है। बड़े अनुष्ठान के बिना भी सावन में किए गए कुछ उपाय ग्रहों की अनुकूलता प्राप्त करने में सहायक माने जाते हैं।
ग्रहों के अनुसार करें ये सरल उपाय
सूर्य संबंधी कष्ट होने पर रविवार को शिव उपासना और शिव मंत्रों का जप करें। चंद्रमा की पीड़ा होने पर शिवलिंग पर दूध अर्पित करें या रुद्राभिषेक कराएं। मंगल के लिए मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करें। बुध के लिए बुधवार को गन्ने के रस से भगवान शंकर का रुद्राभिषेक करना लाभकारी माना गया है।
बृहस्पति के निर्बल होने पर शिवलिंग पर केसर मिश्रित दूध चढ़ाने की सलाह दी गई है। शुक्र संबंधी कष्ट में पंचामृत, शहद और घृत से अभिषेक करें। शनि की साढ़ेसाती या राहु-केतु की पीड़ा होने पर पूरे सावन माह शिवलिंग पर काला तिल मिश्रित जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
राम नाम लेखन और शिव आराधना का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य के अनुसार सावन में शिव आराधना मानसिक तनाव, ग्रह बाधा और जीवन की अन्य समस्याओं को कम करने में सहायक मानी जाती है। विशेष रूप से सावन के मंगलवार और शनिवार को गणेश वंदना, शिव उपासना और राम नाम लेखन का विशेष महत्व है। लाल रंग की कलम से प्रतिदिन कम से कम 108 बार राम नाम लिखने से शनि पीड़ा में राहत और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।


