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देशभर में 58 इंजीनियरिंग कॉलेज होंगे बंद ! यूपी और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा संस्थान प्रभावित

नई दिल्ली। देश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य से ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र के दौरान 58 इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थानों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही देशभर में 950 से अधिक तकनीकी पाठ्यक्रम भी बंद कर दिए गए हैं।

यूपी और महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित

एआईसीटीई के अनुसार, सबसे अधिक 12-12 इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थान उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में बंद किए गए हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश में 8, तेलंगाना और पंजाब में 4-4, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में 3-3, जबकि गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में 2-2 संस्थान प्रभावित हुए हैं। हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में एक-एक संस्थान बंद किया गया है।

मौजूदा विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रहेगी

एआईसीटीई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन संस्थानों को “प्रोग्रेसिव क्लोजर” के तहत बंद किया जा रहा है। इसका अर्थ है कि संबंधित संस्थान नए छात्रों का प्रवेश नहीं ले सकेंगे, लेकिन पहले से नामांकित विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई और डिग्री पूरी करने की अनुमति रहेगी।

कम दाखिले और मानकों की अनदेखी बनी वजह

एआईसीटीई ने बताया कि संस्थानों को बंद करने के प्रमुख कारणों में लगातार कम दाखिला, आवश्यक फैकल्टी की कमी, आधारभूत संरचना के मानकों का पालन नहीं करना और नियामकीय शर्तों का उल्लंघन शामिल है। बंद किए गए 58 संस्थानों में तीन सरकारी सहायता प्राप्त तथा शेष निजी संस्थान हैं।

950 से अधिक पाठ्यक्रम भी बंद

संस्थानों के साथ-साथ देशभर में 950 से अधिक तकनीकी एवं इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों को भी बंद किया गया है। एआईसीटीई ने स्पष्ट किया कि “प्रोग्रेसिव क्लोजर” और “कंप्लीट क्लोजर” अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। प्रोग्रेसिव क्लोजर में मौजूदा छात्रों की पढ़ाई जारी रहती है, जबकि कंप्लीट क्लोजर की स्थिति में छात्रों को अन्य संस्थानों में स्थानांतरित किया जाता है।

एआईसीटीई देश में इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, प्रबंधन, फार्मेसी सहित तकनीकी शिक्षा के विभिन्न पाठ्यक्रमों के मानकों, गुणवत्ता और नियमन की शीर्ष वैधानिक संस्था है।

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