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रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से एक करोड़ से अधिक की ठगी, आप भी हो जाए सावधान…

बिलासपुर/रायपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सेवानिवृत महिला प्रोफेसर (82 वर्षीय)को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर साइबर ठगों ने 01 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये की बड़ी ऑनलाइन ठगी कर ली।

महिला को करीब सात दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया और उन्हें टेरर फंडिंग फर्जी के फर्जी मामले में फंसाने की धमकी देकर 1.04 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। मामले का खुलासा तब हुआ, जब महिला का बेटा घर पहुंचा और सच्चाई सामने आई। बिलासपुर में 1.04 करोड़ रुपये की इस बड़ी साइबर ठगी का शिकार हुई सेवानिवृत्त प्रोफेसर का नाम प्रो. रमन श्रीवास्तव है। वह बिलासपुर के डीपी कॉलेज में पदस्थ थीं और वर्तमान में बिलासपुर के ‘रियल हेवन’ कॉलोनी में रहती हैं।

इस पूरे मामले में बिलासपुर साइबर सेल और संबंधित पुलिस स्टेशन में आधिकारिक एफआईआर 27 अप्रैल को दर्ज कराई गई है। मुंबई निवासी प्रशांत श्रीवास्तव ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वे एचआर कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर हैं। उनकी मां रमन श्रीवास्तव वर्ष 2005 में डीपी विप्र कॉलेज से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुई थीं और वर्तमान में सिविल लाइन थाना क्षेत्र के रियल हैवेन, शांति नगर, मंगला चौक में रहती हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव के अनुसार, 27 अप्रैल को उनकी मां रमन श्रीवास्तव ने फोन पर बताया कि 20 अप्रैल 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप पर संदेश भेजा, जिसमें संजय पीएसआई नाम लिखा था। ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर महिला को फोन किया और कहा कि उनके नाम से अवैध लेनदेन हुआ है। इसके बाद उन्हें डराने के लिए उच्चतम न्यायालय और ईडी के फर्जी नोटिस भी भेजे गए। ठगों ने महिला को लगातार निगरानी में रखा और किसी से बात न करने की हिदायत दी। इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल कर उन्हें धमकाना शुरू किया और कहा कि वे एक टेररिस्ट ग्रुप से जुड़ी हैं और अवैध धन लेन-देन में शामिल हैं, जिसके कारण उन्हें जेल हो सकती है। इसके बाद करीब 3:10 बजे दोबारा वीडियो कॉल कर परिवार, बैंक खातों और वित्तीय जानकारी लेकर लगभग 2 घंटे 16 मिनट तक उन्हें मानसिक रूप से प्रताडि़त किया गया। ठगों ने डराते हुए कहा कि गिरफ्तारी से बचना है तो बताए गए बैंक खातों में सभी पैसे ट्रांसफर करने होंगे। साथ ही धमकी दी गई कि यदि उन्होंने किसी परिजन से संपर्क किया तो उन्हें भी केस में फंसा दिया जाएगा और उनके बेटे-पोतों की भी निगरानी हो रही है।

धमकियों से डरकर पीडि़ता ने आरटीजीएस के माध्यम से पहले 20 लाख 20 हजार रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद विभिन्न बैंक खातों में अलग-अलग किश्तों में कुल 01 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपये जमा करा लिए गए। ठगों ने आगे 50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग भी की। जब पीडि़ता ने अपने बेटे से 50 लाख रुपये मांगे, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। बेटा तुरंत बिलासपुर पहुंचा और उन्हें बताया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

मामले की शिकायत के आधार पर बिलासपुर के रेंज साइबर थाना में ने अज्ञात मोबाइल धारक के खिलाफ बीएनएस की धारा 66(सी), 66(डी ), 308, 318 समेत अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।

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