

देश के शीर्ष केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एमजीसीयू को 35वाँ स्थान
अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ राष्ट्रीय शिक्षा जगत में मजबूत हुई विश्वविद्यालय की पहचान
मोतिहारी ।
महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू), मोतिहारी ने भारतीय उच्च शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क 2025 में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की श्रेणी में देशभर में 35वाँ स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की निरंतर शैक्षणिक प्रगति, शोध उत्कृष्टता, नवाचार, संस्थागत विस्तार और दूरदर्शी नेतृत्व का सशक्त प्रमाण है।
विशिष्ट उल्लेखनीय तथ्य यह है कि अपेक्षाकृत कम समय में स्थापित होने के बावजूद महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अनेक प्रतिष्ठित एवं पुराने विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए यह स्थान प्राप्त किया है। विश्वविद्यालय ने सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय, असम केंद्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड, त्रिपुरा विश्वविद्यालय, नालंदा विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी राष्ट्रीय उपस्थिति को और अधिक सुदृढ़ किया है।कुलपति ने कहा::
– कुलपति ने कहा::
कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि “यह उपलब्धि महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक समर्पण, शैक्षणिक उत्कृष्टता और निरंतर गहन प्रयासों का सुपरिणाम है। हमारा उद्देश्य केवल रैंकिंग प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसा शैक्षणिक वातावरण निर्मित करना है जो राष्ट्र निर्माण, नवाचार, शोध और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर भविष्य की पीढ़ियों का निर्माण करे। विश्वविद्यालय आने वाले समय में और अधिक ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा।” विश्वविद्यालय के शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के अथक परिश्रम एवं समर्पण से यह सुखद परिणाम विश्वविद्यालय को प्राप्त हुए है। सीमित संसाधनों में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पहचान हमारे लिए अत्यंत सुखद ह।
विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर सह प्रवक्ता प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कहा की “महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय आज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि परिवर्तन, संभावनाओं और नवाचार का जीवंत केंद्र बन चुका है। सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय ने जिस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की है, वह अत्यंत प्रेरणादायी है। शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, शोध, सामाजिक चेतना और युवा एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में एमजीसीयू नए मानक स्थापित कर रहा है।
कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव की दूरगामी सोच, स्पष्ट नीति और कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा, शोध, प्रशासन, नवाचार, सामाजिक सहभागिता और छात्र विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। आपके कुशल नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अपने प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन किया। जिनमें भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ एवं सी. पी. राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति रही। एमजीसीयूबी “भारत की परिवर्तनकारी शिक्षा क्रांति” विषय पर आयोजित एजुकेशन कॉन्क्लेव-2026 , राष्ट्रीय शिक्षा नीति, भारतीय ज्ञान परंपरा और भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा। विश्वविद्यालय ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए सैकड़ों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सेमिनार, कार्यशाला, फील्ड विजिट, विभिन्न खेल, सांस्कृतिक आयोजन जैसे कार्यक्रमों को आयोजित करता रहा है जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो।
विश्वविद्यालय को भौतिक दिशा में स्थापित करने की दिशा में तीव्रता आयी है। महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय को अतिरिक्त 127.26 एकड़ भूमि आवंटित होने के बाद अब कुल परिसर क्षेत्र 261.26 एकड़ तक विस्तारित हो चुका है। स्थायी परिसर निर्माण हेतु विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की स्वीकृति प्रदान की गई तथा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के साथ विकास कार्यों को गति दी गई। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर महिला छात्रावास की स्थापना, प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण, शैक्षणिक अवसंरचना का विस्तार तथा विभिन्न नई सुविधाओं के विकास ने विश्वविद्यालय की संरचनात्मक क्षमता को और मजबूत किया है।
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पाँच वर्षीय समेकित- स्नातक-स्नातकोत्तर कार्यक्रमों की शुरुआत, भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र की स्थापना तथा सैकड़ों राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन विश्वविद्यालय की अकादमिक सक्रियता और वैचारिक नेतृत्व को दर्शाता है। समर्थ ई-गवर्नेंस पोर्टल, ऑनलाइन प्रमाणपत्र निर्गमन, डिजिटल भुगतान व्यवस्था तथा शोधार्थियों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू कर प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता को नई दिशा दी गई है।
शोध एवं अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। आईसीएसएसआर एवं आईसीएमआर जैसी संस्थाओं से शोध अनुदान प्राप्त हुए हैं। विश्वविद्यालय का शोध कार्य प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एसीएस एप्लाइड नैनो मैटेरियल्स के कवर पृष्ठ तक पहुँचा, जबकि कई शिक्षकों को स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान प्राप्त हुआ।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रांची, इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स डार्टमाउथ (अमेरिका), मुजफ्फरपुर प्रौद्योगिकी संस्थान सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए है। जिनके माध्यम से शोध, नवाचार, छात्र विनिमय और अकादमिक सहयोग को नई गति मिली है।
छात्र उपलब्धियों के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय लगातार नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। 500 से अधिक विद्यार्थियों ने यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण की है जबकि लगभग 300 विद्यार्थियों ने गेट परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। कई विद्यार्थियों का चयन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, तकनीकी संस्थानों तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों में हुआ है। विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र का अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, रिवरसाइड में पूर्णतः वित्तपोषित पीएचडी कार्यक्रम में चयन विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक पहचान का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
राधा वन, चंपारण उपवन, अमृत वाटिका तथा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ जैसे अभियानों के माध्यम से विश्वविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रभावशाली मॉडल प्रस्तुत किया है। खेल एवं छात्र कल्याण के क्षेत्र में आधुनिक खेल परिसर, ओपन जिम तथा ‘उमंग’ वार्षिक खेल महोत्सव जैसे प्रयास विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।
“महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की निरंतर विकसित होती शैक्षणिक संस्कृति, संस्थागत प्रतिबद्धता और सामूहिक परिश्रम की राष्ट्रीय मान्यता है। बहुत कम समय में एमजीसीयू ने जिस प्रकार शिक्षा, शोध, नवाचार, सामाजिक सरोकार और भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, वह अत्यंत गौरवपूर्ण है। यह उपलब्धि बिहार सहित पूर्वी भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए भी प्रेरणास्रोत है और आने वाले समय में विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को और अधिक सशक्त करेगी।
