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मेहसी की लीची को वैश्विक पहचान दिलाने का लिया संकल्प

  • 18 वें लीचीपुरम उत्सव का हुआ भव्य रूप से समापन

मोतिहारी

पूर्वी चंपारण जिले के
मेहसी की प्रसिद्ध शाही लीची की मिठास और गौरव को समर्पित 18वें लीचीपुरम उत्सव का दो दिवसीय आयोजन मंगलवार को उत्साह, सांस्कृतिक रंगों और विकास के संकल्पों के साथ संपन्न हो गया। उत्सव के दूसरे दिन विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को नई ऊर्जा प्रदान की।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि व स्थानीय विधायक श्याम बाबू यादव, मोतिहारी विधायक प्रमोद कुमार, हरसिद्धि विधायक कृष्णानंद पासवान, कल्याणपुर विधायक सचिंद्र प्रसाद सिंह, लीचीपुरम उत्सव समिति के अध्यक्ष अरविंद कुमार गुप्ता, चकिया नगर परिषद के सभापति पवन सर्राफ, मुखिया राकेश पाठक, बी.के. वीरेंद्र तथा सत्यदेव राय आर्य ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

मुख्य अतिथि विधायक श्याम बाबू यादव ने कहा कि सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह द्वारा वर्ष 2027 से लीचीपुरम उत्सव को बिहार सरकार के स्तर पर आयोजित कराने की जो घोषणा की गई है, उसे साकार करने के लिए सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह उत्सव अब केवल मेहसी का नहीं, बल्कि पूरे बिहार की पहचान बन चुका है।

मोतिहारी विधायक प्रमोद कुमार ने कहा कि लीची के महत्व को उत्सव का स्वरूप देकर उसे नई पहचान प्रदान की जा रही है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2008 में इस उत्सव का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था और तब से यह आयोजन निरंतर सफलतापूर्वक जारी है। उन्होंने लीचीपुरम उत्सव समिति को 18 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा के लिए बधाई दी।

हरसिद्धि विधायक कृष्णानंद पासवान ने कहा कि मेहसी की लीची चंपारण की शान है। इसकी मिठास और गुणवत्ता देश-दुनिया में चर्चित है। लीची यहां केवल एक फल नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि और क्षेत्र की पहचान का प्रतीक बन चुकी है।

कल्याणपुर विधायक सचिंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि मेहसी की लीची को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सरलता से पहुंचाने और इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सभी जनप्रतिनिधि मिलकर प्रयास करेंगे। उन्होंने लीचीपुरम उत्सव समिति के महासचिव सुदिष्ट नारायण ठाकुर के आयोजन को लेकर 17 वर्षों के जुझारूपन की सराहना करते हुए कहा कि अब तक के आयोजन में उनका बहुत बड़ा योगदान है।

उत्सव के दौरान वक्ताओं ने लीची उत्पादन, विपणन, प्रसंस्करण एवं पर्यटन की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कार्यक्रम में क्षेत्रीय संस्कृति, कृषि और लोक परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

इस अवसर पर विनोद दुबे, मनोज मेहसवी, डॉ. मनोज, शंकर कुशवाहा, महासचिव सुदिष्ट नारायण ठाकुर, सफी अहमद खान, विजय कृष्ण, मृदुल मिश्रा, अजय चौरसिया, जयंत कुमार मोनू, अजय कुमार सिंह, रत्नेश कुमार सिंह, अशोक कुशवाहा, गुड्डू कुमार, मोहम्मद कादिर सहित लीचीपुरम उत्सव समिति के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

दो दिनों तक चले इस उत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मेहसी की लीची केवल स्वाद का नहीं, बल्कि क्षेत्र की संस्कृति, कृषि और आर्थिक विकास का भी प्रतीक है। उत्सव के समापन के साथ ही अगले वर्ष इसे और भव्य रूप देने की उम्मीदें भी प्रबल हो गई हैं।

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