असम में आबकारी नियमों में बड़ा बदलाव, शराब दुकानों की दूरी और लाइसेंस स्थानांतरण के नए प्रावधान लागू

गुवाहाटी। असम सरकार ने आबकारी व्यवस्था में व्यापक सुधार करते हुए असम आबकारी (संशोधन) नियमावली-2026 लागू कर दी है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद जारी नई नियमावली के तहत शराब बिक्री, दुकानों की स्थापना, लाइसेंस स्थानांतरण और राजस्व संग्रहण से जुड़े कई नए प्रावधान प्रभावी हो गए हैं।

न्यूनतम सुनिश्चित राजस्व जमा करना होगा अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा, बीयर और देशी शराब के थोक एवं खुदरा विक्रेताओं के लिए न्यूनतम सुनिश्चित राजस्व जमा करना अनिवार्य होगा। वित्तीय वर्ष को चार तिमाहियों में विभाजित कर क्रमशः 22, 25, 27 और 26 प्रतिशत राजस्व जमा करना होगा। निर्धारित राशि जमा नहीं करने पर 10 प्रतिशत जुर्माना और विलंब की स्थिति में प्रति माह 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा।

शराब दुकानों के बीच तय की गई न्यूनतम दूरी

संशोधित नियमों में शराब दुकानों के बीच न्यूनतम दूरी को भी अनिवार्य बनाया गया है। कामरूप महानगर जिले में दो खुदरा शराब दुकानों के बीच कम से कम 500 मीटर की दूरी रखनी होगी। अन्य नगर निगम, नगरपालिका और नगर समिति क्षेत्रों में यह दूरी एक किलोमीटर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में दो किलोमीटर निर्धारित की गई है।

बोतलों की क्षमता को लेकर भी बने नए नियम

खुदरा दुकानों में केवल सीलबंद 180 मिलीलीटर या उससे अधिक क्षमता वाली बोतलों में ही शराब बिक्री की अनुमति होगी। वहीं होटल, बार और अन्य ऑन-शॉप प्रतिष्ठानों में न्यूनतम 750 मिलीलीटर की बोतलों का उपयोग किया जाएगा। ग्राहकों को परोसने के लिए निर्धारित माप का उपयोग होगा और एक पूर्ण पेग 60 मिलीलीटर तय किया गया है।

लाइसेंस स्थानांतरण पर सख्त प्रावधान

नए नियमों के तहत ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों या नगरपालिका क्षेत्रों में शराब दुकान स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानांतरण किया जा सकेगा। नगर निगम क्षेत्रों में दुकान स्थानांतरण के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी।

अंतर-जिला स्थानांतरण के मामले में कामरूप महानगर से अन्य जिलों में दुकान स्थानांतरित की जा सकेगी, लेकिन अन्य जिलों से कामरूप महानगर में स्थानांतरण की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा लाइसेंस मिलने के तीन वर्ष के भीतर अंतर-जिला स्थानांतरण पर रोक रहेगी।

पारंपरिक जनजातीय मदिरा को मिला संरक्षण

संशोधित नियमावली में जनजातीय समुदायों द्वारा निर्मित पारंपरिक मदिरा को भी संरक्षण दिया गया है। इसके लिए सूक्ष्म विनिर्माण इकाइयों की अधिकतम उत्पादन क्षमता प्रतिदिन एक हजार लीटर निर्धारित की गई है। साथ ही विभिन्न श्रेणियों के लाइसेंस शुल्क में भी कमी की गई है।

नई श्रेणी ‘असम निर्मित मदिरा’ जोड़ी गई

सरकार ने ‘असम निर्मित मदिरा’ नामक नई श्रेणी भी शुरू की है। इसके लिए विनिर्माण लाइसेंस आवेदन शुल्क एक लाख रुपये और विक्रय लाइसेंस शुल्क 50 हजार रुपये निर्धारित किया गया है।

राजस्व बढ़ाने और व्यवस्था सुधारने पर जोर

राज्य सरकार का कहना है कि नए नियमों से शराब कारोबार का बेहतर नियमन होगा, सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी और अनधिकृत लाइसेंस स्थानांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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