ढाका। बांग्लादेश की अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वह इसी वर्ष अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें फांसी की सजा भी मंजूर है, लेकिन वह बांग्लादेश लौटने के अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और इसका उद्देश्य अवामी लीग को नेतृत्वविहीन करना है।
अदालत के फैसले को बताया राजनीतिक
एक इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उनके खिलाफ दिए गए फैसले न्यायसंगत नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि अवामी लीग को कमजोर करने की कोशिश पहले भी हुई है, लेकिन ऐसी सभी कोशिशें विफल रही हैं और आगे भी विफल होंगी।
‘मौत से नहीं लगता डर’
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें मौत का कोई भय नहीं है। उन्होंने 1975 में अपने पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान समेत परिवार के अधिकांश सदस्यों की हत्या तथा वर्ष 2004 में उन पर हुए ग्रेनेड हमले का जिक्र करते हुए कहा कि वह पहले भी कई साजिशों का सामना कर चुकी हैं।
देश लौटने का दोहराया संकल्प
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की जनता ने उन्हें पांच बार प्रधानमंत्री चुना और उन्होंने देश के विकास के लिए काम किया। उनका पूरा राजनीतिक जीवन लोकतंत्र, अवामी लीग और बांग्लादेश के लोगों के लिए समर्पित रहा है। इसी कारण वह हर बाधा और साजिश का सामना करते हुए इसी साल बांग्लादेश लौटेंगी।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई का उद्देश्य केवल उन्हें नहीं, बल्कि उनकी पार्टी के नेतृत्व को भी समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव के बावजूद वह अपने फैसले पर कायम हैं और देश वापसी का संकल्प पूरा करेंगी।
