नई दिल्ली। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित 21वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही वैश्विक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है।
दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के सम्मेलन में क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, म्यांमार संकट, दक्षिण चीन सागर विवाद और पश्चिम एशिया संघर्ष जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
विश्व में बढ़ रही चुनौतियों पर जताई चिंता
विदेश मंत्री ने कहा कि नई क्षमताओं, बदलते संबंधों और उभरती चुनौतियों के कारण दुनिया में बड़े संरचनात्मक बदलाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राजनीति और सुरक्षा के मुद्दे आर्थिक हितों और दक्षता पर प्रभाव डाल रहे हैं, जबकि जोखिम बढ़ने की प्रवृत्ति भी देखी जा रही है।
जयशंकर ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था कई संघर्षों से प्रभावित है। ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, खासकर विकासशील देशों के लिए यह महत्वपूर्ण विषय है।
समुद्री सुरक्षा और वैश्विक शांति पर जोर
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित और निर्बाध रहने चाहिए। नागरिक जहाजों, नाविकों और समुद्री ढांचों पर किसी भी तरह के हमले स्वीकार्य नहीं हैं।
दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि भारत ऐसी आचार संहिता का समर्थन करता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौते के अनुरूप हो तथा सभी देशों के वैध अधिकारों की रक्षा करे।
म्यांमार और साइबर ठगी पर भारत का रुख
म्यांमार संकट पर विदेश मंत्री ने राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि भारत आसियान के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने साइबर ठगी केंद्रों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों से बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत मानवीय सहायता के क्षेत्र में लगातार योगदान दे रहा है और स्थायी शांति के लिए दो-राज्य समाधान का समर्थन करता है।


