नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से ऐसे 16 नए बैक्टीरियोफेज तैयार किए हैं, जो पहले कभी प्रकृति में नहीं पाए गए थे। इस शोध को जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एंटीबायोटिक दवाओं से असरहीन हो चुके संक्रमणों के इलाज के नए विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘साइंस’ में प्रकाशित हुआ है। इसमें अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इवो-1 और इवो-2 नामक एआई मॉडल का उपयोग किया, जिन्हें करीब 20 लाख बैक्टीरियोफेज के आनुवंशिक आंकड़ों पर प्रशिक्षित किया गया था।
300 जीनोम में से 16 सफल
एआई ने हजारों संभावित जीनोम तैयार किए, जिनमें से लगभग 300 को प्रयोगशाला में बनाया गया। इनमें केवल 16 बैक्टीरियोफेज सफलतापूर्वक विकसित हो सके। परीक्षण में इनका मिश्रण ई. कोलाई बैक्टीरिया की उन किस्मों को भी नष्ट करने में सक्षम पाया गया, जो प्राकृतिक बैक्टीरियोफेज के प्रति प्रतिरोधी हो चुकी थीं।
मरीजों के लिए क्या हो सकता है फायदा
बैक्टीरियोफेज ऐसे वायरस होते हैं जो केवल बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। भविष्य में एआई की मदद से किसी मरीज के संक्रमण के अनुसार विशेष बैक्टीरियोफेज तेजी से तैयार किए जा सकते हैं। इससे गंभीर और बार-बार होने वाले बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज में नई उम्मीद मिल सकती है, खासकर उन मरीजों के लिए जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं असर करना बंद कर चुकी हों।
हालांकि वैज्ञानिकों ने इस तकनीक के दुरुपयोग की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि यदि ऐसी तकनीक गलत हाथों में पहुंचती है, तो जैव सुरक्षा से जुड़े नए खतरे भी पैदा हो सकते हैं।


