घरों में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक इनवर्टर और एसिड बैटरी सिस्टम की जगह अब नई ESS (एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस तकनीक में इनवर्टर और लिथियम बैटरी एक ही यूनिट में मौजूद होते हैं, जिससे बैटरी में पानी भरने या बार-बार बैटरी बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
क्या है ESS इनवर्टर?
ESS इनवर्टर एक ऑल-इन-वन यूनिट होता है, जिसे दीवार पर लगाया जा सकता है। इसमें अलग से बैटरी जोड़ने की आवश्यकता नहीं होती। पारंपरिक लेड-एसिड बैटरी की जगह इसमें LFP (लिथियम आयरन फॉस्फेट) बैटरी का उपयोग किया जाता है, जिसकी अनुमानित आयु 10 से 12 वर्ष तक हो सकती है।
पारंपरिक इनवर्टर से कैसे अलग?
सामान्य इनवर्टर में अलग एसिड बैटरी का उपयोग होता है, जिसमें नियमित रूप से डिस्टिल्ड पानी डालना पड़ता है और कुछ वर्षों बाद बैटरी बदलनी पड़ सकती है। ESS इनवर्टर प्योर साइन वेव तकनीक पर काम करता है, जिससे पंखों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में आवाज कम आती है और संवेदनशील उपकरणों को अपेक्षाकृत बेहतर गुणवत्ता की बिजली मिलती है।
जगह की बचत और तेज चार्जिंग
ESS सिस्टम आकार में कॉम्पैक्ट होता है और दीवार पर लगाया जा सकता है, इसलिए यह फर्श पर जगह नहीं घेरता। लिथियम बैटरी होने के कारण यह तेजी से चार्ज होता है और भारी लोड वाले उपकरणों को भी संभाल सकता है। इसके ग्रिड-ओनली और सोलर-हाइब्रिड दोनों प्रकार के मॉडल उपलब्ध हैं।
कितनी क्षमता का सिस्टम चुनें?
यदि घर में केवल लाइट, पंखा और टीवी चलाना है तो लगभग 0.8 से 1 kVA क्षमता का मॉडल पर्याप्त हो सकता है। छोटा फ्रिज जोड़ने पर 1.3 से 1.5 kVA और अधिक उपकरणों के लिए 2 से 3 kVA क्षमता का ESS सिस्टम उपयुक्त माना जाता है।
कीमत कितनी हो सकती है?
बाजार में ESS इनवर्टर की कीमत क्षमता के अनुसार बदलती है। लगभग 0.8–1 kVA मॉडल की कीमत 22,000 से 32,000 रुपये, 1.3–1.5 kVA मॉडल की 28,000 से 40,000 रुपये और 2–3 kVA मॉडल की कीमत लगभग 55,000 से 95,000 रुपये तक हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई उपभोक्ता लंबे समय तक कम रखरखाव वाला और आधुनिक पावर बैकअप समाधान चाहता है, तो ESS इनवर्टर पारंपरिक इनवर्टर-बैटरी सिस्टम का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।


