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असम में बाढ़ से 433 गांवों के 86,832 लोग प्रभावित, दो और शव बरामद

गुवाहाटी। असम में बाढ़ की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन राज्य के सात जिलों में अभी भी 433 गांवों के 86,832 लोग प्रभावित हैं। इस बीच शिवसागर और कार्बी आंगलोंग जिले से एक-एक शव बरामद होने के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 104 हो गई है। राज्य की अधिकांश नदियों का जलस्तर सामान्य स्थिति में पहुंच गया है, हालांकि धनसिरी नदी नुमलीगढ़ में अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

राहत शिविरों में रह रहे प्रभावित लोग अब धीरे-धीरे अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। हालांकि, बाढ़ से क्षतिग्रस्त घरों और सुरक्षित बचे मकानों में भी दो से तीन फुट तक मिट्टी जमा होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावितों की सहायता के लिए विभिन्न संगठनों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। राज्य सरकार की ओर से भी आवश्यक राहत और पुनर्वास व्यवस्था की जा रही है। स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।

सात जिलों के 433 गांव बाढ़ की चपेट में

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार धनसिरी नदी नुमलीगढ़ में अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बुधवार को शिवसागर जिले और कार्बी आंगलोंग जिले से एक-एक शव बरामद किया गया। बाढ़ प्रभावित जिलों में गोलाघाट, होजाई, शिवसागर, नगांव, जोरहाट और कार्बी आंगलोंग शामिल हैं।

इन जिलों के 24 राजस्व मंडलों के कुल 433 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। वर्तमान में 86,832 लोग बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हैं, जबकि 10,884.27 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है।

79 राहत शिविर और केंद्र संचालित

राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 42 राहत शिविर और 37 राहत वितरण केंद्र समेत कुल 79 केंद्र संचालित रखे हैं। राहत शिविरों में 7,216 लोग शरण लिए हुए हैं। वहीं राहत वितरण केंद्रों के माध्यम से 5,795 गैर-शिविर निवासियों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

बाढ़ राहत और बचाव अभियान में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, जिला आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, अंचल कार्यालय, स्थानीय प्रशासन तथा नागरिक सुरक्षा के प्रशिक्षित स्वयंसेवक जुटे हुए हैं। बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा और राज्य सरकार के मंत्री अधिकारियों के साथ लगातार बैठक कर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

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