नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की कार्यवाही गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बीच सरकार 12 विधेयक पारित कराने में सफल रही। हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विधेयकों पर चर्चा की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही।
रिजिजू ने गुरुवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार सदन में चर्चा के लिए तैयार थी और विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा से बचने का रास्ता अपनाया। उन्होंने बताया कि लोकसभा में 11 विधेयक पेश किए गए, जबकि दोनों सदनों से कुल 12 विधेयक पारित हुए। लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा कि लोकसभा लगातार बाधित रही। हालांकि राज्यसभा में कुछ विपक्षी दलों के बहिर्गमन के बावजूद कुछ विपक्षी सदस्यों ने बहस में हिस्सा लिया। रिजिजू ने कहा कि मानसून सत्र कामकाज के लिहाज से अच्छा रहा, लेकिन चर्चा के स्तर पर संतोषजनक नहीं रहा।
कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मिली संसद की मंजूरी
मानसून सत्र के दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजा गया। विपक्ष इस विधेयक को वापस लेने की मांग कर रहा था। वहीं परीक्षा पत्र लीक के मामलों में कठोर दंड का प्रावधान करने वाला लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया गया। इस विधेयक पर लोकसभा में चर्चा हुई, जबकि अन्य विधेयक बिना चर्चा के पारित किए गए।
सत्र में वंदेमातरम को राष्ट्रगान के समान सम्मान देने वाला राष्ट्र-गौरव अपमान-निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 और केरल का नाम बदलकर केरलम करने संबंधी केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी मिली।
इसके अलावा जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक, 2026, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026, बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026, कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026, अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 और खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 भी पारित किए गए।
नारेबाजी के बजाय सार्थक चर्चा की जरूरत
रिजिजू ने कहा कि पहले विपक्ष में रहते हुए भी नेता बातचीत और चर्चा में शामिल होते थे, लेकिन अब विपक्ष चर्चा से बच रहा है। उन्होंने कहा कि संसद में केवल नारेबाजी और तख्तियां लेकर विरोध करना संसदीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
संसदीय कार्य मंत्री ने नए सांसदों को सार्थक बहस और चर्चा का अवसर नहीं मिलने पर भी चिंता जताई। उन्होंने उम्मीद जताई कि शीतकालीन सत्र में सभी दल आत्ममंथन के साथ बेहतर सहयोग करेंगे और संसद में अधिक सार्थक एवं रचनात्मक चर्चा देखने को मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस दौरान दोनों सदनों की कुल 19 बैठकें हुईं।



