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क्या गुम चोट में सचमुच फायदा करता है हल्दी वाला दूध? जानिए क्या कहता है वैज्ञानिक शोध

हल्दी वाला दूध भारतीय घरों में लंबे समय से गुम चोट, सर्दी-जुकाम, शरीर दर्द और संक्रमण जैसी समस्याओं के लिए घरेलू नुस्खे के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। अक्सर गिरने या चोट लगने पर सबसे पहले हल्दी वाला दूध पीने की सलाह दी जाती है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में लाभ पहुंचाता है या केवल परंपरा के कारण प्रचलित है।

हल्दी वाला दूध क्यों माना जाता है फायदेमंद

विशेषज्ञों के अनुसार हल्दी में पाया जाने वाला सक्रिय तत्व कर्क्यूमिन सूजन कम करने और शरीर को ऑक्सीडेटिव क्षति से बचाने में सहायक माना जाता है। इसी वजह से हल्दी को आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों में महत्वपूर्ण औषधीय गुणों वाला पदार्थ माना गया है। जब हल्दी को गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो दूध में मौजूद वसा कर्क्यूमिन के अवशोषण में कुछ हद तक मदद कर सकती है। हालांकि कर्क्यूमिन की जैव उपलब्धता स्वाभाविक रूप से कम होती है, इसलिए इसका प्रभाव सीमित हो सकता है।

कर्क्यूमिन शरीर में कैसे काम करता है

शोध बताते हैं कि कर्क्यूमिन शरीर में सूजन से जुड़े कुछ रासायनिक तत्त्वों की सक्रियता को कम करने, फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को घटाने और शरीर की प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट प्रणाली को समर्थन देने में भूमिका निभा सकता है। इसी कारण गठिया, सूजन संबंधी रोगों और मांसपेशियों की रिकवरी पर इसके संभावित लाभों को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं।

क्या गुम चोट में वास्तव में लाभ मिलता है

हल्की मांसपेशीय चोट, खिंचाव या मुलायम ऊतकों में आई सूजन की स्थिति में हल्दी वाला दूध कुछ लोगों को आराम पहुंचा सकता है। व्यायाम के बाद होने वाली सूजन और दर्द में भी कर्क्यूमिन से कुछ लाभ मिलने के संकेत मिले हैं। लेकिन विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि यह हड्डी टूटने, गंभीर अंदरूनी रक्तस्राव, गहरी चोट या किसी गंभीर दुर्घटना का इलाज नहीं है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।

संक्रमण और सावधानी से जुड़ी जरूरी बातें

संक्रमण के मामलों में भी हल्दी में जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी और कवकरोधी गुण पाए गए हैं, लेकिन उपलब्ध प्रमाण अभी सीमित हैं। इसलिए हल्दी वाला दूध सामान्य संक्रमण के दौरान शरीर को सहारा दे सकता है, परंतु यह डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं का विकल्प नहीं है। रक्त को पतला करने वाली दवाएं लेने वाले मरीज, पित्त की पथरी, गंभीर यकृत रोग, ऑक्सालेट पथरी, हल्दी से एलर्जी या गर्भावस्था के दौरान अधिक मात्रा में हल्दी का सेवन करने वाली महिलाओं को चिकित्सकीय सलाह के बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि हल्दी वाला दूध पूरी तरह वहम नहीं है। हल्की अंदरूनी चोट, सामान्य सूजन या रिकवरी के दौरान यह सहायक घरेलू उपाय हो सकता है, लेकिन इसे गंभीर चोट या संक्रमण के उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि दर्द, सूजन या अन्य लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित उपाय है।

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