Homeअन्तर्राष्ट्रीयआदित्य के हाथों में झारखंड भाजपा की कमान

आदित्य के हाथों में झारखंड भाजपा की कमान

रांची: झारखंड भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लंबे समय से चल रहे संगठन पर्व का औपचारिक समापन हो गया। राज्यसभा सांसद आदित्य साहू को पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित घोषित किया गया। यह घोषणा केंद्रीय मंत्री एवं झारखंड संगठन पर्व के चुनाव अधिकारी जुएल उरांव ने रांची के कार्निवाल बैंकेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की।

आदित्य साहू प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार थे। उनके नामांकन के बाद किसी अन्य प्रत्याशी के मैदान में न उतरने से वे निर्विरोध निर्वाचित हुए। इस मौके पर जुएल उरांव ने झारखंड से 21 राष्ट्रीय परिषद सदस्यों के नामों की भी घोषणा की। इनमें लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष करिया मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, समीर उरांव, अन्नपूर्णा देवी, रघुवर दास, चंपाई सोरेन, भानुप्रताप शाही, अभयकांत प्रसाद, गीता कोड़ा, मधु कोड़ा, प्रदीप वर्मा सहित कई वरिष्ठ और प्रमुख नेता शामिल हैं।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अपने पहले संबोधन में आदित्य साहू ने भाजपा को “मां” बताते हुए कहा कि इस पार्टी ने उन्हें पहचान दी है, जिसके लिए वे आजीवन ऋणी रहेंगे। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय सहित पार्टी के पुरोधाओं को नमन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए साहू ने कहा कि भाजपा में बूथ स्तर से लेकर शीर्ष तक पहुंचने का रास्ता खुला है।

उन्होंने “चरैवेति-चरैवेति” का मंत्र दोहराते हुए कार्यकर्ताओं से धैर्य और निरंतर संघर्ष बनाए रखने की अपील की। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को उन्होंने बड़े भाई की संज्ञा देते हुए कहा कि अब उनका हर क्षण पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए समर्पित रहेगा। साहू ने स्पष्ट किया कि भाजपा की असली ताकत बूथ स्तर के कार्यकर्ता हैं और पार्टी की सफलता की नींव वहीं से रखी जाती है।

आदित्य साहू ने अपने भाषण में हेमंत सोरेन सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार को विफल बताते हुए कहा कि भाजपा को सरकार बनाने की हड़बड़ी नहीं, बल्कि झारखंड को बचाने की हड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव में झूठ और भ्रम के कारण भाजपा सरकार नहीं बना सकी, लेकिन जनता का भरोसा आज भी पार्टी के साथ है।

साहू ने राज्य में जमीन लूट, घुसपैठियों की बढ़ती संख्या, संथाल परगना क्षेत्र में मतदाताओं की असामान्य वृद्धि (78.6 प्रतिशत) और पेसा नियमावली में कथित छल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को बाहर करने का संकल्प लिया है, जबकि विपक्षी दल SIR जैसे कदमों का विरोध कर रहे हैं।

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