कढ़ी पत्ता भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है। इसे खरीदने के बजाय घर पर भी आसानी से उगाया जा सकता है। यदि सही कटिंग, उचित मौसम और सही देखभाल का ध्यान रखा जाए, तो कुछ ही सप्ताह में नई जड़ें विकसित हो सकती हैं। हालांकि, कटिंग से पौधा तैयार होने की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है, इसलिए हर बार शत-प्रतिशत सफलता की गारंटी नहीं होती।
सही कटिंग का करें चयन
कढ़ी पत्ते की ऐसी शाखा चुनें जो न बहुत नई हो और न ही बहुत पुरानी। इसकी मोटाई लगभग एक पेंसिल जितनी और लंबाई 10 से 12 सेंटीमीटर होनी चाहिए। ऊपर की कुछ पत्तियां लगी रहने दें।
कटिंग का निचला हिस्सा तैयार करें
साफ ब्लेड या चाकू की मदद से कटिंग के निचले हिस्से की लगभग एक सेंटीमीटर बाहरी छाल हल्के से हटा दें। इससे नई जड़ों के निकलने में मदद मिल सकती है।
मानसून का मौसम सबसे उपयुक्त
कटिंग लगाने के लिए बारिश का मौसम अच्छा माना जाता है। इस समय वातावरण में नमी अधिक होने से कटिंग के सूखने की संभावना कम रहती है और जड़ें बनने में आसानी हो सकती है।
रूटिंग हार्मोन का इस्तेमाल करें
यदि उपलब्ध हो तो कटिंग के निचले हिस्से पर रूटिंग हार्मोन लगाएं। इसके विकल्प के रूप में एलोवेरा जेल या दालचीनी पाउडर का भी उपयोग किया जा सकता है, जो फफूंद से बचाव और जड़ बनने की प्रक्रिया में सहायक हो सकते हैं।
उपयुक्त माध्यम में लगाएं
कटिंग को अच्छी जल निकासी वाले माध्यम में लगाएं। मोटी रेत या नदी की रेत का उपयोग किया जा सकता है। इससे अतिरिक्त पानी नहीं रुकता और जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती है। कटिंग को लगभग 1 से 2 इंच गहराई तक लगाएं।
ऐसे करें देखभाल
कटिंग लगाने के बाद गमले को कुछ दिनों तक ऐसी जगह रखें जहां तेज सीधी धूप न आती हो। माध्यम में हल्की नमी बनाए रखें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी न डालें। अनुकूल परिस्थितियों में लगभग 15 से 20 दिनों के भीतर नई जड़ें विकसित होना शुरू हो सकती हैं।
ध्यान रखें
कटिंग से पौधा तैयार होने का परिणाम मौसम, कटिंग की गुणवत्ता, नमी और देखभाल पर निर्भर करता है। यदि पहली बार सफलता न मिले, तो दूसरी स्वस्थ कटिंग के साथ दोबारा प्रयास किया जा सकता है।


