रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में रोजगार, कौशल विकास और श्रमिक कल्याण योजनाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा योजना एवं विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि राज्य के युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने, श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पलायन की समस्या को कम करने के लिए ठोस एवं परिणामकारी कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के असंगठित, निर्माण और प्रवासी श्रमिकों का अद्यतन डाटाबेस तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगले तीन महीने के भीतर देश के विभिन्न राज्यों में कार्यरत झारखंड के श्रमिकों का विस्तृत विवरण ई-श्रम पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। इससे राज्य सरकार को श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और आपातकालीन परिस्थितियों में उनकी सहायता करने में सुविधा होगी।
बड़े शहरों में खुलेंगे प्रवासी सहायता केंद्र
प्रवासी श्रमिकों की मदद के लिए सरकार देश के प्रमुख महानगरों—नोएडा, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु और मुंबई में प्रवासी सहायता केंद्र स्थापित करेगी। ये केंद्र राज्य के श्रमिकों को प्रशासनिक सहयोग, कानूनी सलाह और आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएंगे।
विशेष अभियान चलाकर होगा श्रमिकों का निबंधन
मुख्यमंत्री ने श्रमिक निबंधन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए विशेष शिविर लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा सहित सभी श्रमिकों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही निर्माण स्थलों पर कार्यरत मजदूरों की सुरक्षा के लिए हेलमेट, जूते और ग्लव्स जैसी सुरक्षा सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए। सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा संबंधी सूचना बोर्ड लगाने और श्रमिकों के लिए एक समान ड्रेस कोड तय करने पर भी जोर दिया गया।
पलायन रोकने के लिए बनेगी नई रणनीति
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड को केवल श्रमिक उपलब्ध कराने वाले राज्य की छवि से बाहर निकालना होगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
मुख्यमंत्री ने रोजगार की तलाश में चौक-चौराहों पर जुटने वाले मजदूरों के लिए ‘श्रमिक पड़ाव’ विकसित करने का निर्देश दिया। इन स्थानों पर शेड, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि इन्हें ‘श्रमिक चौक-सह-सुविधा केंद्र’ के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
हर जिले में तैयार होगा मॉडल आईटीआई
राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में एक आईटीआई को मॉडल संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां उद्योगों की मांग के अनुरूप नए कोर्स शुरू किए जाएंगे और हाई वैल्यू कृषि आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए मजबूत प्लेसमेंट व्यवस्था विकसित की जाए। इसके लिए बड़ी कंपनियों के विशेषज्ञों और अनुभवी पेशेवरों की सेवाएं प्रशिक्षण संस्थानों में ली जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से किया सीधा संवाद
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईटीआई धनबाद के पूर्व छात्र सूरज कुमार और लोहरदगा की प्रशिक्षित युवती अनिमा कुमारी से बातचीत की। दोनों युवाओं ने अपने रोजगार, कार्यस्थल और प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य के अधिक से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
बैठक में विभागीय मंत्री संजय प्रसाद यादव, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, श्रम सचिव जितेंद्र कुमार सिंह, श्रमायुक्त संदीप सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
