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पीरियड्स में सावन सोमवार का व्रत कैसे करें? जानें नियम, पूजा विधि और क्या खाएं

सावन सोमवार का व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है। लेकिन कई महिलाओं के मन में यह सवाल आता है कि यदि व्रत के दौरान पीरियड्स शुरू हो जाएं तो क्या व्रत जारी रखा जा सकता है, पूजा कैसे करें और क्या खाना चाहिए। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी स्थिति में कुछ नियमों का पालन करते हुए व्रत रखा जा सकता है।

व्रत का संकल्प बीच में न तोड़ें

यदि आपने पहले से सावन सोमवार या सोलह सोमवार के व्रत का संकल्प लिया है और बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो परंपरागत मान्यता के अनुसार व्रत नहीं तोड़ना चाहिए। उस दिन भी उपवास रखा जा सकता है और व्रत की गिनती जारी रहती है।

मंदिर जाने और पूजा सामग्री को स्पर्श करने से बचें

कई धार्मिक परंपराओं में पीरियड्स के दौरान मंदिर जाने, शिवलिंग का स्पर्श करने और पूजा सामग्री को हाथ लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे में घर पर दूर बैठकर भगवान शिव का ध्यान करना अधिक उचित माना जाता है।

मानसिक पूजा करें

यदि पीरियड्स के कारण प्रत्यक्ष पूजा संभव न हो, तो मानसिक पूजा की जा सकती है। दूर बैठकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें, शिव चालीसा, शिव स्तुति या सोमवार व्रत कथा का मन ही मन पाठ करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें।

भोग स्वयं न बनाएं

पारंपरिक मान्यता के अनुसार व्रत के दिन भगवान शिव का भोग घर के किसी अन्य सदस्य से बनवाकर अर्पित करवाना उचित माना जाता है। भोग लगने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर सकती है।

पहली बार व्रत शुरू करना हो तो क्या करें

यदि आप पहली बार सावन सोमवार का व्रत शुरू करने जा रही हैं और उसी दिन पीरियड्स आ जाएं, तो परंपरागत मान्यता के अनुसार व्रत की शुरुआत अगले सोमवार से करना अधिक उचित माना जाता है। लेकिन यदि व्रत पहले से चल रहा है, तो उस सोमवार की गिनती भी व्रत में शामिल रहती है।

पीरियड्स में व्रत के दौरान क्या खाएं

पीरियड्स के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में पूरी तरह भूखे रहने के बजाय फल, दूध, दही, हर्बल चाय, नारियल पानी और अन्य व्रत में स्वीकार्य हल्के आहार का सेवन किया जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

सबसे महत्वपूर्ण बात

धार्मिक परंपराएं अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में भिन्न हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और अपनी शारीरिक स्थिति दोनों का सम्मान करना चाहिए। यदि स्वास्थ्य ठीक न हो, तो व्रत में आवश्यक छूट लेना भी उचित माना जाता है।

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