कोलेजन सप्लीमेंट का सच, जानिए कितना है असर

खूबसूरत और जवां त्वचा के लिए इन दिनों कोलेजन सप्लीमेंट्स का चलन तेजी से बढ़ा है। बाजार में गमी, ड्रिंक, पाउडर, टैबलेट और इंजेक्शन जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। लेकिन क्या ये वास्तव में असरदार हैं? त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता नखवा के अनुसार, सही तरीके और चिकित्सकीय सलाह के साथ लिए गए कोलेजन सप्लीमेंट त्वचा के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, हालांकि इनका असर व्यक्ति की उम्र, खानपान और जीवनशैली पर भी निर्भर करता है।

क्या है कोलेजन और क्यों है जरूरी?

कोलेजन शरीर का सबसे अधिक पाया जाने वाला प्रोटीन है, जो त्वचा, हड्डियों, मांसपेशियों, जोड़ों और लिगामेंट्स को मजबूती देता है। यह त्वचा में कसाव, लचीलापन और नमी बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, 25 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में प्राकृतिक रूप से कोलेजन का निर्माण कम होने लगता है। धूम्रपान, असंतुलित खानपान, प्रदूषण और पर्याप्त नींद न लेने जैसी आदतें इसकी कमी को और बढ़ा सकती हैं।

कोलेजन की कमी होने पर चेहरे पर महीन रेखाएं और झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं। त्वचा ढीली पड़ने लगती है, चमक कम हो जाती है और घाव भरने में भी अधिक समय लग सकता है।

क्या वाकई असर करते हैं कोलेजन सप्लीमेंट?

विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में मिलने वाले अधिकांश कोलेजन सप्लीमेंट हाइड्रोलाइज्ड कोलेजन पेप्टाइड्स होते हैं, जिन्हें शरीर आसानी से पचा लेता है। शरीर इन्हें अमीनो अम्ल में बदलकर अपनी जरूरत के अनुसार उपयोग करता है।

कोलेजन सप्लीमेंट ड्रिंक, गमी या टैबलेट किसी भी रूप में लिए जाएं, उनका असर उनकी गुणवत्ता, सही मात्रा और नियमित सेवन पर निर्भर करता है। आमतौर पर 8 से 12 सप्ताह के नियमित उपयोग के बाद त्वचा की नमी, लचीलापन और झुर्रियों में कमी जैसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ लोगों में नाखून भी पहले से मजबूत हो जाते हैं।

हालांकि इनके सेवन से कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जिनमें पेट फूलना, अपच, जी मिचलाना, मुंह का स्वाद बिगड़ना और पेट में असहजता शामिल है। मछली, समुद्री भोजन या डेयरी उत्पादों से एलर्जी वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के इनका सेवन नहीं करना चाहिए।

क्रीम, सीरम और इंजेक्शन कितना करते हैं काम?

विशेषज्ञों का कहना है कि कोलेजन युक्त क्रीम और सीरम त्वचा को नमी तो देते हैं, लेकिन इनके बड़े अणु त्वचा की गहराई तक नहीं पहुंच पाते। इसलिए ये नया कोलेजन बनाने में सक्षम नहीं होते। यदि त्वचा में प्राकृतिक रूप से कोलेजन बढ़ाना चाहते हैं तो विटामिन सी, रेटिनॉइड, पेप्टाइड और सनस्क्रीन वाले उत्पाद अधिक उपयोगी माने जाते हैं।

वहीं, कोलेजन इंजेक्शन शरीर को नया कोलेजन बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इनका असर धीरे-धीरे कुछ सप्ताह बाद दिखाई देता है। चूंकि यह चिकित्सकीय प्रक्रिया है, इसलिए इसे केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में ही कराना चाहिए।

स्वस्थ त्वचा के लिए विशेषज्ञ सप्लीमेंट्स के साथ-साथ संतुलित आहार और अच्छी जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं। पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन सी युक्त फल, नियमित व्यायाम, भरपूर नींद, रोजाना सनस्क्रीन का उपयोग, धूम्रपान से दूरी और अधिक चीनी वाले भोजन से परहेज प्राकृतिक रूप से कोलेजन बनाए रखने में मददगार साबित हो सकते हैं।

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