पलामू। पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों की रहस्यमयी मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा खुलासा किया है। सिविल सर्जन डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने शनिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि आर्जीमोन मिले सरसों के तेल के सेवन से परिवार के सदस्यों को ड्रॉप्सी रोग हुआ, जिसके कारण उनकी मौत हुई।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ खुलासा
सिविल सर्जन ने बताया कि आर्जीमोन मिला सरसों का तेल कुलदीप मेहता के परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। तेल के सेवन से परिवार के सदस्यों को ड्रॉप्सी रोग हो गया, जिससे पहले पैरों में सूजन आई और धीरे-धीरे पूरे शरीर में सूजन फैलने के बाद उनकी मौत हो गई।
मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सिक्का गांव के 195 घरों का सर्वे किया और 1,378 लोगों की स्वास्थ्य जांच की। इस दौरान 56 लोगों के हाथ-पैर में सूजन मिलने पर उनके रक्त नमूने लिए गए, लेकिन उनमें ड्रॉप्सी रोग की पुष्टि नहीं हुई। जांच के लिए विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने भी भेजे गए थे, जिनमें कोई अन्य गड़बड़ी नहीं मिली।
क्या है आर्जीमोन?
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि आर्जीमोन एक कांटेदार खर-पतवार है, जो पलामू क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे कटैला या पीला धतूरा भी कहा जाता है। सरसों की फसल की कटाई के दौरान इसके बीज सरसों में मिल गए, जिससे तैयार तेल दूषित हो गया और उसके सेवन से यह गंभीर बीमारी फैल गई।
पांच लोगों की हो चुकी है मौत
गौरतलब है कि सिक्का गांव में कुलदीप मेहता के परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो चुकी है। 19 जून को कुलदीप मेहता, 20 जून को उनकी बेटी बबिता कुमारी, 26 जून को दूसरी बेटी इंदु कुमारी, 28 जून को बहू श्वेता मेहता और बाद में रांची स्थित रिम्स में बेटे नकुल मेहता की मौत हुई। परिवार के दो अन्य सदस्य अभी भी उपचाराधीन हैं। सभी में शरीर में सूजन के समान लक्षण पाए गए थे।
