नई दिल्ली। नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर करीब दो महीने तक चुप्पी साधे रखी और भारी जनदबाव के बाद सरकार ने प्रश्नपत्र लीक की सच्चाई स्वीकार की।
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने छात्रों के हितों से ज्यादा राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी, कमजोर जांच कराई और जवाबदेही से बचने की कोशिश की। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाने और छात्रों से माफी मांगने की मांग की।
सरकार पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश ने लगाए आरोप
जयराम रमेश ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि प्रधानमंत्री ने करीब दो महीने की चुप्पी के बाद देर रात वीडियो संदेश जारी कर प्रश्नपत्र लीक मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लंबे समय तक यह मानने से इनकार करती रही कि नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ था।
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी प्रेसवार्ता में जानबूझकर लीक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और शिक्षा मंत्रालय ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने भी आधिकारिक रूप से प्रश्नपत्र लीक से इनकार किया था।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जनता के दबाव के बाद प्रधानमंत्री को आखिरकार सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी, लेकिन सरकार के रवैये के कारण छात्रों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है।
नीट मामले की जांच और कार्रवाई पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि नीट-यूजी परीक्षा में कुछ केंद्रों पर बड़ी संख्या में टॉपर्स सामने आने के बावजूद सरकार ने अनियमितताओं को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि बाद में सरकार ने हजारीबाग में प्रश्नपत्र लीक की बात स्वीकार की, लेकिन अब तक दोषियों को सजा नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि जिस संजीव मुखिया को पहले प्रश्नपत्र लीक का मुख्य आरोपी बताया गया था, अब उसी मामले में अलग स्थिति सामने आ रही है। उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यूजीसी-नेट मामले में प्रश्नपत्र लीक नहीं होने की बात कहकर रिपोर्ट दाखिल की गई, लेकिन इसके कारणों का खुलासा नहीं किया गया।
शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग
जयराम रमेश ने कहा कि पेपर लीक संकट का समाधान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, छात्रों पर हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने से शुरू होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों की कमजोर जांच और सरकार के नेतृत्व की विफलता को दर्शाता है।


