नई दिल्ली। हैदराबाद हाउस में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “चिप्स से लेकर शिप्स, टैलेंट से लेकर टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट से लेकर एनर्जी—भारत और कोरिया मिलकर सहयोग के नए अवसरों को साकार करेंगे।” उन्होंने इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए “महत्वपूर्ण मोड़” बताते हुए कहा कि दोनों देश अपनी साझेदारी को एक “भविष्य उन्मुख” दिशा में ले जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 27 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों ने कई अहम कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की है, जिनमें “भारत-कोरिया वित्तीय मंच” की स्थापना भी शामिल है। डिजिटल और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए “इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज” पहल शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास किए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और कोरिया के बीच हजारों वर्ष पुराने ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की कथा का जिक्र करते हुए इसे साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत में कोरियाई पॉप संस्कृति और धारावाहिकों की लोकप्रियता बढ़ रही है, जबकि कोरिया में भारतीय सिनेमा और संस्कृति के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। दोनों देशों ने वर्ष 2028 में “भारत-कोरिया मैत्री महोत्सव” आयोजित करने की भी घोषणा की, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और बढ़ावा मिलेगा। वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत और कोरिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक समान दृष्टिकोण साझा करते हैं और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता तथा समावेशी विकास के लिए मिलकर काम करेंगे। इस अवसर पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कहा कि दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि वहां शांति और स्थिरता की बहाली वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए आवश्यक है। राष्ट्रपति ली ने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए एक समझौता हुआ है, जिससे दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के यहां यात्रा के दौरान स्थानीय क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं। भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को अपग्रेड करने के लिए बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई। यह निर्णय वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक व्यवधानों के बीच दोनों देशों के आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच सोमवार को हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद यह घोषणा की गई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और अन्य महत्वपूर्ण समझौतों का आदान-प्रदान भी हुआ।
