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राहुल गांधी ने लगाया सीबीएसई कॉपी मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप, बोर्ड ने दी सफाई

नई दिल्ली : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कॉपियों के मूल्यांकन (मार्किंग) को लेकर उठे विवादों पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक और प्रतिष्ठित संस्था को धांधली का प्रतीक बना दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की विश्वसनीयता पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं। इस साल 18.5 लाख बच्चों ने परीक्षा दी है और पिछले एक हफ्ते से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम), गलत मार्किंग और जांच में भारी गड़बड़ी की शिकायतें अनसुनी पड़ी हैं।

सवाल पूछने वाले युवाओं को डराती है सरकार: विपक्ष

राहुल गांधी ने एक छात्र का उदाहरण देते हुए कहा कि एक 17 साल का बच्चा, जिसकी कॉपी गलत जांची गई थी, न्याय की उम्मीद में सोशल मीडिया पर आया, लेकिन उसे मदद मिलने के बजाय ट्रोलर्स द्वारा देशद्रोही और डीप स्टेट का हिस्सा कहकर बदनाम किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और ‘जेन जी’ (Gen Z) से डरती है, क्योंकि वे अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। जो भी छात्र या नागरिक सवाल पूछता है, यह सरकार उसे बदनाम करती है, डराती है और आवाज़ को कुचलती है।

पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर तकनीकी खामियों से छात्र व अभिभावक परेशान

उल्लेखनीय है कि सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद से ही पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) की प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। देश भर के छात्रों का कहना है कि बोर्ड द्वारा उपलब्ध कराई जा रही उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियां इतनी धुंधली हैं कि उन्हें पढ़ना बेहद मुश्किल है। कई छात्रों ने निर्धारित फीस जमा करने के बावजूद पेमेंट कंफर्मेशन न मिलने और पोर्टल पर तकनीकी खामियों की शिकायत की है। पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर बार-बार ‘साइट अंडर मेंटेनेंस’ का संदेश आने से अभिभावक और छात्र मानसिक रूप से परेशान हैं।

बोर्ड का दावा: प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, आंसर शीट देखने की फीस घटाई

विवाद बढ़ता देख सीबीएसई बोर्ड ने आधिकारिक सफाई जारी की है। बोर्ड के अनुसार, वेबसाइट पर अचानक ट्रैफिक ज्यादा होने की वजह से पेमेंट स्टेटस अपडेट होने में देरी हो रही है, इसलिए छात्रों को बार-बार आवेदन नहीं करना चाहिए। बोर्ड ने छात्रों को बड़ी राहत देते हुए घोषणा की है कि अब छात्र मात्र 100 रुपये में अपनी आंसर शीट देख सकते हैं, जबकि पहले इसके लिए 700 रुपये का भारी शुल्क देना पड़ता था। इसके अलावा, किसी विशेष प्रश्न की दोबारा जांच कराने के लिए महज 25 रुपये फीस तय की गई है। बोर्ड का दावा है कि यह कदम पूरी तरह पारदर्शिता और छात्रों के हित में उठाया गया है।

ओएसएम प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित: शिक्षा सचिव

सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और विद्यालय शिक्षा सचिव संजय कुमार ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया काफी तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनती है। यह आधुनिक तकनीक देश के कई बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पहले से ही सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है, इसलिए छात्रों को किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

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