टीएमसी में बगावत तेज, ममता बनर्जी का बड़ा एक्शन, 8 वरिष्ठ नेता पार्टी से निष्कासित

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने बागी तेवर अपनाने वाले आठ वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। निष्कासित नेताओं में फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, अरूप बिस्वास, जावेद अहमद खान, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा, सबीना यास्मीन और स्नेहाशीष चक्रवर्ती शामिल हैं।

बागी गुट के गठन के बाद बढ़ा विवाद

टीएमसी में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए अलग संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की थी। बागी गुट ने एक विशेष बैठक में अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष, फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास को उपाध्यक्ष बनाने का ऐलान किया था। इसके साथ ही 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन की भी घोषणा की गई थी।

टीएमसी नेतृत्व ने इसे पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए संबंधित नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर निष्कासन की कार्रवाई की गई।

ममता को ‘मेंटोर’ बनाने की बात भी आई सामने

ऋतब्रत बनर्जी गुट ने दावा किया था कि वह ममता बनर्जी का सम्मान करता है और उन्हें संगठन में मार्गदर्शक एवं मेंटोर की भूमिका में देखना चाहता है। हालांकि ममता समर्थक गुट ने इस पहल को पार्टी पर कब्जे की कोशिश करार दिया है।

फिरहाद हकीम को चीफ व्हिप पद से हटाने की मांग

राजनीतिक संघर्ष के बीच ममता गुट ने विधानसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद से फिरहाद हकीम को हटाने की मांग भी की है। उनकी जगह विधायक मदन मित्रा को नियुक्त करने का प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को भेजा गया है। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने पार्टी के भीतर चल रहे विवाद और कानूनी पहलुओं का हवाला देते हुए फिलहाल कोई फैसला लेने से इनकार कर दिया है।

टीएमसी में गहराया सत्ता संघर्ष

पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रही बगावत और शीर्ष नेताओं के निष्कासन के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ टीएमसी का आंतरिक संकट अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज हो सकता है।

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