नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक सेवा का मूल उद्देश्य नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि हर सरकारी फाइल के पीछे करोड़ों लोगों की आकांक्षाएं, उम्मीदें और जीवन जुड़े होते हैं, इसलिए प्रत्येक निर्णय में आम नागरिक को केंद्र में रखा जाना चाहिए।
‘नागरिक देवो भव’ को अपनाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में नियुक्त 2024 बैच के 183 आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से ‘नागरिक देवो भव’ के मंत्र को अपनाने और संवेदनशील व उत्तरदायी प्रशासन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि दो वर्षों के प्रशिक्षण के बाद अधिकारी ऐसे महत्वपूर्ण चरण में हैं, जहां उनके फैसले न केवल उनके करियर बल्कि देश के करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी प्रभावित करेंगे।
विकसित भारत-2047 को बताया लक्ष्य
मोदी ने विकसित भारत-2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में सभी नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों का उद्देश्य देश को विकसित राष्ट्र बनाना होना चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार, ऊर्जा सुरक्षा और रोजगार सृजन को राष्ट्रीय प्राथमिकताएं बताया।
परिणाम आधारित शासन पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में शासन व्यवस्था प्रक्रिया आधारित मॉडल से परिणाम आधारित मॉडल की ओर बढ़ी है। डिजिटल गवर्नेंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक के बढ़ते उपयोग से पारदर्शिता और सेवा वितरण की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने अधिकारियों से आंकड़ों को केवल संख्या के रूप में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन और उनकी चुनौतियों का प्रतिबिंब मानकर देखने की सलाह दी।
विभागीय समन्वय को बताया जरूरी
मोदी ने कहा कि आज की जटिल विकास चुनौतियों का समाधान अलग-अलग विभागों के स्तर पर संभव नहीं है। इसके लिए समग्र सरकारी दृष्टिकोण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रभावी सहयोग से ही स्थायी और सार्थक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर जताई खुशी
प्रधानमंत्री ने वर्तमान आईएएस बैच में 40 प्रतिशत से अधिक महिला अधिकारियों की मौजूदगी को प्रशासनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि यह देश के सामाजिक और प्रशासनिक बदलाव की नई तस्वीर पेश करता है।
राष्ट्र निर्माण में योगदान पर दिया संदेश
युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे पद और प्रतिष्ठा के बजाय अपने कार्यों के परिणामों से संतुष्टि प्राप्त करें और राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान का निरंतर मूल्यांकन करते रहें। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा अधिकारियों की ऊर्जा, प्रतिभा और समर्पण भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम में केंद्रीय कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा, प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव रचना शाह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
