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होर्मुज संकट के बीच किसानों को राहत, भारत पहुंचे खाद से लदे 15 जहाज

नई दिल्ली। मानसून के बीच किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने बताया है कि फारस की खाड़ी में फंसे खाद से लदे 20 जहाजों में से 15 सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। इससे खरीफ सीजन के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

रणनीतिक तैयारी से टला संकट

अमेरिका-ईरान तनाव के बाद भारत ने समय रहते वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर काम शुरू कर दिया था। सरकार ने खाड़ी देशों के साथ समन्वय बढ़ाने के साथ-साथ लाल सागर मार्ग का भी उपयोग किया, जिससे खाद की आपूर्ति बाधित नहीं हुई। विदेशों में भारतीय मिशनों ने भी वैश्विक उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के साथ संपर्क स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

घरेलू उत्पादन ने भी बढ़ाई ताकत

सरकार के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के दौरान यूरिया उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा। तीन महीनों में 67.9 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 71.6 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ। अप्रैल में 21 लाख टन, मई में 25.2 लाख टन और जून में 25.4 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया।

कई देशों से मजबूत हुई आपूर्ति

भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्किये और नीदरलैंड्स सहित कई देशों से यूरिया आपूर्ति सुनिश्चित की है। वहीं डीएपी और एनपीके जैसे उर्वरकों की आपूर्ति के लिए रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब के साथ भी व्यवस्था की गई है।

रूस के साथ बढ़ रहा सहयोग

भारत और रूस संयुक्त उद्यम के तहत रूस के समारा में लगभग 20 लाख टन क्षमता का यूरिया संयंत्र स्थापित कर रहे हैं। करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में इंडियन पोटाश लिमिटेड, आरसीएफ और एनएफएल शामिल हैं। इसका उद्देश्य भविष्य में खाद आयात पर निर्भरता कम करना है।

किसानों को मिलेगा लाभ

सरकार का कहना है कि आयात और घरेलू उत्पादन दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति बनने से खरीफ फसलों के लिए उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी। इससे किसानों को समय पर खाद मिलने में आसानी होगी और खेती पर संभावित संकट टल सकेगा।

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