नई दिल्ली। मध्य पूर्व में संघर्ष विराम के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ तटीय रडार ठिकानों पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिका ने दावा किया है कि यह कार्रवाई एक मालवाहक जहाज पर हुए कथित हमले के जवाब में की गई।
कार्गो जहाज पर हमले के बाद जवाबी कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान समर्थित हमलों से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ, जिसके बाद मिसाइल, ड्रोन और रडार ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी प्रशासन ने इसे समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम बताया है।
ट्रंप ने ईरान पर लगाए संघर्ष विराम उल्लंघन के आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के कथित ड्रोन हमले की निंदा करते हुए इसे संघर्ष विराम का “गंभीर उल्लंघन” बताया। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरीक के ताहेरौयेह पियर क्षेत्र में जोरदार विस्फोट हुआ, जिसे बाहरी हमले से जोड़कर देखा जा रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी चिंता
ईरान ने चेतावनी दी है कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश न करे। हालांकि कई व्यापारिक जहाज वैकल्पिक समुद्री मार्गों का इस्तेमाल कर अपनी आवाजाही जारी रखे हुए हैं। रणनीतिक जलमार्ग में बढ़े तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सामान्य व्यापार बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इजरायल-लेबनान समझौते से बदला क्षेत्रीय समीकरण
इसी बीच अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच एक नए शांति ढांचे पर सहमति बनी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ईरान के प्रभाव को कमजोर करने वाला समझौता बताया, जबकि ईरान समर्थित हिजबुल्ला ने इसका विरोध करते हुए इसे लेबनान की स्थिरता के लिए खतरा बताया है।
