HomeBlogजर्दा की खुशबू से महकी चंपारण की गांव गलियारे

जर्दा की खुशबू से महकी चंपारण की गांव गलियारे

रघुनाथपुर की ‘सद्दाम नर्सरी’ बनी बागवानों की उम्मीद

मोतिहारी।

जेठ की तपती दुपहरी में जब हवा का झोंका चलता है तो चंपारण की गलियों में आम की भीनी खुशबू घुल जाती है। इस बार यह खुशबू खास है – चंपारण के सुगंधित ‘जर्दा आम’ की। जर्दा अब सिर्फ फल नहीं, इस मिट्टी की पहचान बन गया है।

इसी पहचान को हरा-भरा करने में जुटे हैं मोतिहारी के रघुनाथपुर स्थित ‘सद्दाम नर्सरी’ के संचालक मोहम्मद सद्दाम। कम समय में ही ईमानदारी और गुणवत्ता के दम पर उन्होंने किसानों और आम प्रेमियों का भरोसा जीत लिया है।

  • जर्दा आम की खासियत

चंपारण के जर्दा आम की खासियत कुछ खास ही है। जिससे उसे अन्य आम की वेराइटी से अलग बनाती है। इस जर्दा आम की अनोखी सुगंध होती है। यह पेड़ पर पकते ही इसकी हल्की तीखी झांस के साथ मीठी खुशबू दूर तक फैल जाती है। यह बेजोड़ मिठास, बेहद रसीला, कम रेशे वाला आम होता है। जिसे एक बार चख लें तो स्वाद भूल नहीं पाएंगे।

-, नर्सरी की खासियत :

सद्दाम नर्सरी की खासियत यह है कि अब दुर्लभ फलदार पौधों के लिए दूसरे राज्य नहीं जाना पड़ता। यहां देश-विदेश की बेहतरीन किस्में किफायती दर पर मिल जाती हैं। जर्दा, अल्फांसो, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, मल्लिका, बारहमासी आम से लेकर मुजफ्फरपुर की शाही लीची, चाइना लीची, कश्मीरी नाशपाती, सेब, अमरूद और विभिन्न नींबू नस्लें तक मौजूद है।
सबसे खास बात है कि नर्सरी की अपनी ‘जैविक खाद’ का उपयोग होता है। रासायनिक खाद के दौर में यह खाद पौधों के लिए अमृत साबित हो रही है। ग्रोथ तेज करती है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखती है। मांग अब मोतिहारी से निकलकर आसपास के जिलों तक पहुंच रही है।

नर्सरी संचालक मोहम्मद सद्दाम कहते हैं, “हमारा मकसद सिर्फ व्यापार नहीं, हर चंपारण वासी के आंगन में एक फलदार पेड़ देखना है। हम चाहते हैं चंपारण का हर घर हरा-भरा और समृद्ध हो।”
कंक्रीट के जंगल में यह छोटी सी हरियाली सुकून देती है। सद्दाम नर्सरी सिर्फ एक दुकान नहीं, मिट्टी से प्रेम और चंपारण को हरा-भरा देखने के सपने की कहानी है। प्रकृति से प्यार करने वालों के लिए यहां एक चक्कर लगाना ताजगी भरा अनुभव होगा।

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