नई दिल्ली। भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई) ने स्पष्ट किया है कि कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित होने के बावजूद आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) से लेनदेन मुफ्त रहेगा। परिषद ने कहा कि यूपीआई के इस्तेमाल पर उपभोक्ताओं से कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
छोटे कारोबारियों पर भी एमडीआर नहीं
पीसीआई ने सामाजिक मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि वर्ष 2016 में शुरू होने के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और आगे भी ऐसा ही रहेगा। किराना दुकानदारों सहित छोटे कारोबारियों को यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क नहीं देना होगा।
परिषद ने कहा कि भविष्य में यदि बड़े कारोबारियों पर मर्चेंट सेवा शुल्क लागू किया जाता है, तब भी इसका बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा। जहां लागू होता है, एमडीआर व्यापारी और भुगतान सेवा प्रदाता के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होती है।
वित्त मंत्री ने भी किया स्पष्ट
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी विधेयक पारित होने के बाद स्पष्ट किया था कि एमडीआर ग्राहकों पर नहीं, बल्कि कारोबारियों पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी कंपनियां भुगतान ढांचे और सुरक्षा को मजबूत करने में करती हैं।
दरअसल, लोकसभा ने एक दिन पहले भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से जुड़ा प्रावधान पारित किया था, जिसके तहत सरकार को यूपीआई सहित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति दी गई है। इसके बाद यूपीआई पर शुल्क लगने की आशंकाओं के बीच पीसीआई ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई लेनदेन मुफ्त बना रहेगा।


