
-सदर अस्पताल में ‘100 दिवसीय विशेष अभियान’ की हुई विस्तृत समीक्षा
वैशाली।
सदर अस्पताल परिसर स्थित एमसीएच भवन पर बने सभागार में ‘100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत’ कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वैशाली के सिविल सर्जन और सीडीओ ने की। इस बैठक में जिले में चल रहे अभियान की प्रगति रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान जिला स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बेहद गौरवपूर्ण और उत्साहजनक जानकारी सामने आई कि इस राष्ट्रीय अभियान में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए वैशाली जिला देश के टॉप-10 जिलों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है। सिविल सर्जन डॉ श्याम नंदन प्रसाद ने इस बड़ी सफलता के लिए पूरी टीम की पीठ थपथपाई और साथ ही वहां मौजूद सभी एसटीएस, एसटीएलएस तथा एनटीईपी टीम को कड़े निर्देश भी जारी किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अभियान के अब मात्र 30 दिन शेष बचे हैं, इसलिए सभी कर्मी अपनी पूरी कार्यक्षमता के साथ जुट जाएं ताकि निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में हासिल किया जा सके।
इस विशेष कार्यशाला के दौरान ‘100 डेज प्रोग्राम’ के अंतर्गत जिले में संचालित किए जा रहे पांच प्रमुख तकनीकी बिंदुओं पर विस्तार से विमर्श किया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में जिले के भीतर संदिग्ध मरीजों के त्वरित पंजीकरण यानी एनरोलमेंट, सघन एक्स-रे जांच, टीबी निवारक थेरेपी यानी टीपीटी, मरीजों की जरूरत के अनुसार डिफरेंशिएटेड टीबी केयर और निक्षय ऑनलाइन पोर्टल पर रियल-टाइम डेटा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को बेहद प्राथमिकता के साथ धरातल पर उतारा जा रहा है।
अभियान को और अधिक प्रभावी व तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए इस कार्यशाला में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कई वरिष्ठ विशेषज्ञों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। इसमें मुख्य रूप से शामिल डब्ल्यूएचओ सलाहकार मेजर आकाश द्वारा उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को एनटीईपी की बारीक गाइडलाइंस को बहुत ही सरल ढंग से समझाया गया। वहीं दूसरी ओर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर यानी एसएमओ डॉ. आनंद ने टीबी की जीवन रक्षक दवाओं के सही तरीके से वितरण और अस्पताल स्तर पर उनके सुरक्षित भंडारण यानी स्टोरेज की व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही, राज्य स्तर के पदाधिकारी व एसएमओ डॉ. रविशंकर ने टीबी के विषय में विस्तृत विमर्श करते हुए लक्ष्य की समय पर प्राप्ति हेतु आवश्यक और कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।
कार्यशाला के अंतिम सत्र में सीडीओ वैशाली ने जिले में टीबी उन्मूलन से जुड़े सभी चालू कार्यों का जायजा लिया और प्रशासनिक स्तर पर इसमें और अधिक गति लाने के लिए उचित दिशा-निर्देश जारी किए। सिविल सर्जन वैशाली ने पूरी कार्यशाला का निष्कर्ष साझा करते हुए कहा कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से समाप्त करने का एकमात्र मूलमंत्र मरीजों की जल्द से जल्द पहचान यानी आइडेंटिफिकेशन करना और बिना समय गंवाए उनका उचित इलाज शुरू करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सही समय पर शुरू हुआ इलाज ही मरीज को पूर्ण स्वस्थ बना सकता है और हमें हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंचा सकता है।
