नई दिल्ली। कुछ लोग दूसरों की गलतियों, धोखे या खराब व्यवहार के बावजूद उनसे नफरत नहीं कर पाते। वे गुस्सा करने के बजाय यह समझने की कोशिश करते हैं कि सामने वाले ने ऐसा क्यों किया। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे एक खास मानसिक प्रवृत्ति होती है, जिसे कॉग्निटिव एम्पैथी कहा जाता है।
मनोवैज्ञानिक परम संधू के अनुसार, ऐसे लोग किसी व्यक्ति के व्यवहार को सिर्फ उसके कर्मों से नहीं, बल्कि उसकी परिस्थितियों से भी जोड़कर देखते हैं। यही कारण है कि वे सामने वाले की गलतियों के पीछे छिपी वजह समझने की कोशिश करते हैं।
कॉग्निटिव एम्पैथी क्या है?
कॉग्निटिव एम्पैथी का मतलब है किसी दूसरे व्यक्ति की मानसिक स्थिति और परिस्थितियों को समझने की क्षमता। ऐसे लोग किसी के बुरे व्यवहार पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय यह सोचते हैं कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया और किन हालात में ऐसा कदम उठाया।
दूसरों का दर्द भी महसूस होने लगता है
ऐसे लोगों को सामने वाले की परेशानियां और दर्द भी दिखाई देने लगता है। जब वे किसी से नाराज होने की कोशिश करते हैं, तब भी उन्हें उसकी अच्छी बातें और पुराने अच्छे व्यवहार याद आने लगते हैं। इसी वजह से उनके मन में नफरत की जगह दया या सहानुभूति पैदा हो जाती है।
खुद भी मानसिक पीड़ा झेलते हैं
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, दूसरों को समझने वाले लोग कई बार अपनी भावनाओं को दबा देते हैं। वे सामने वाले की मजबूरी को तो समझ लेते हैं, लेकिन अपनी तकलीफ खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। बाहर से सामान्य दिखने वाले ऐसे लोग अंदर ही अंदर भावनात्मक दर्द झेलते रहते हैं।
हर किसी को जीवन में बनाए रखना जरूरी नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी की परिस्थितियों को समझना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बार उसे अपनी जिंदगी में जगह दी जाए। यदि किसी के व्यवहार से आपको लगातार मानसिक पीड़ा पहुंच रही है, तो उसे माफ करके भी उससे दूरी बनाना पूरी तरह सही निर्णय हो सकता है। अपनी मानसिक शांति और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है।
