मानसून के मौसम में पैरों में नमी और पसीना अधिक रहने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। यही कारण है कि जूते या मोजे उतारते ही पैरों से तेज बदबू आने लगती है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो खुजली, लालिमा, त्वचा का छिलना और फंगल संक्रमण जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
क्यों आती है पैरों से बदबू?
पैरों में पसीने की ग्रंथियां अधिक होती हैं। लंबे समय तक बंद जूते या गीले मोजे पहनने से पसीना सूख नहीं पाता। इस नमी में बैक्टीरिया और फंगस पसीने व मृत त्वचा पर पनपते हैं, जिससे दुर्गंध पैदा होती है। बारिश के मौसम में लगातार नमी रहने से यह समस्या और बढ़ जाती है।
बचाव के आसान उपाय
- दिन में कम से कम दो बार पैरों को साबुन से धोएं।
- पैर धोने के बाद उंगलियों के बीच की जगह भी अच्छी तरह सुखाएं।
- गीले मोजे तुरंत बदलें और सूती मोजों का उपयोग करें।
- गीले जूते पहनने से बचें और जूतों को पूरी तरह सूखने दें।
- एंटीफंगल फुट पाउडर का इस्तेमाल करें।
- संभव हो तो खुले और हवादार फुटवियर पहनें।
घरेलू उपाय
चाय का पानी: दो टी-बैग या दो चम्मच चाय उबालकर पानी ठंडा करें। इसमें 15–20 मिनट तक पैर भिगोएं।
सिरका: एक भाग सिरका और दो भाग गुनगुना पानी मिलाकर 15 मिनट तक पैरों को भिगोएं।
बेकिंग सोडा: गुनगुने पानी में दो चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर 15 मिनट तक पैर रखें। इससे बदबू और नमी कम होती है।
सेंधा नमक: गुनगुने पानी में एक चम्मच सेंधा नमक मिलाकर 15 मिनट तक पैरों को भिगोने से सफाई और ताजगी मिलती है।
इन गलतियों से बचें
- लंबे समय तक गीले जूते या मोजे पहनना।
- पैरों को बिना सुखाए मोजे पहन लेना।
- दूसरों के मोजे या जूते इस्तेमाल करना।
- खुजली, त्वचा छिलने या लालिमा को नजरअंदाज करना।
- सार्वजनिक स्थानों पर नंगे पैर चलना।
कब डॉक्टर से मिलें?
अगर बदबू के साथ लगातार खुजली, त्वचा फटना, लालिमा, पस, नाखून का मोटा होना या रंग बदलना जैसी समस्या हो, तो तुरंत त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं। यह फंगल संक्रमण का संकेत हो सकता है।
