Homeफीचरआस्थाइच्छा पूरी होने के बाद भी मन क्यों नहीं भरता? जानें अध्यात्म...

इच्छा पूरी होने के बाद भी मन क्यों नहीं भरता? जानें अध्यात्म क्या कहता है

मनुष्य का जीवन इच्छाओं और आकांक्षाओं के इर्द-गिर्द घूमता है। एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है। यही कारण है कि व्यक्ति क्षणिक सुख तो प्राप्त कर लेता है, लेकिन स्थायी संतोष नहीं मिल पाता। अध्यात्म के अनुसार, विषय-वासनाओं की यह अंतहीन श्रृंखला ही मनुष्य की अशांति का सबसे बड़ा कारण है।

इच्छाएं क्यों नहीं होतीं समाप्त?

अध्यात्म के अनुसार, भौतिक सुख और वस्तुओं की चाह कभी पूरी नहीं होती। एक अभाव दूर होने के बाद दूसरा अभाव सामने आ जाता है। इसी कारण व्यक्ति लगातार नई इच्छाओं को पूरा करने की दौड़ में लगा रहता है और मन को स्थायी शांति नहीं मिलती।

लाभ-हानि की सोच में उलझ जाता है मन

धन और भौतिक सुखों के प्रति अधिक आसक्ति रखने वाला व्यक्ति हर काम को लाभ-हानि के तराजू पर तौलने लगता है। उसकी सोच का केंद्र केवल आर्थिक फायदा बन जाता है। इससे मन की शांति और संतोष धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।

गुरु और ईश्वर की कृपा का महत्व

अध्यात्म मानता है कि जब व्यक्ति अपने प्रयासों के बावजूद आगे बढ़ने में असमर्थ महसूस करता है, तब गुरु का मार्गदर्शन और ईश्वर की कृपा उसे सही दिशा दिखाती है। यही मार्ग जीवन में स्थिरता और आत्मिक संतोष की ओर ले जाता है।

स्थायी सुख का मार्ग क्या है?

आध्यात्मिक दृष्टि से संसार की कोई भी वस्तु मनुष्य की सभी इच्छाओं को हमेशा के लिए समाप्त नहीं कर सकती। इसलिए बाहरी सुखों की अपेक्षा आत्मचिंतन, संतोष और ईश्वर की भक्ति को जीवन का आधार बनाने की सलाह दी जाती है। यही सच्चे और स्थायी आनंद का मार्ग माना गया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments