सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश के साथ 17 जुलाई से संक्रांति आधारित सावन मास का शुभारंभ हो गया है। देश के कुछ हिस्सों में सावन की गणना सूर्य संक्रांति के आधार पर की जाती है, जबकि कुछ स्थानों पर पूर्णिमा के बाद से सावन मास माना जाता है। संक्रांति के अनुसार यह सावन 17 जुलाई से 17 अगस्त तक रहेगा।
पूर्णिमा और संक्रांति के अनुसार अलग-अलग सावन
संक्रांति के अनुसार सावन का पहला सोमवार 20 जुलाई को पड़ेगा। वहीं पूर्णिमा आधारित परंपरा का पालन करने वाले क्षेत्रों में सावन 30 जुलाई से शुरू होगा और पहला सोमवार 3 अगस्त को आएगा। इस परंपरा के अनुसार सावन 28 अगस्त को समाप्त होगा।
सावन में क्या करें
- भगवान शिव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करें।
- प्रतिदिन शिवलिंग का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- जरूरतमंदों को दान-पुण्य करें।
- तीर्थ स्नान और धार्मिक कार्यों में भाग लें।
- व्रत और भगवान शिव के मंत्रों का जप करें।
सावन में क्या न करें
- मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन न करें।
- हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन सीमित रखने की परंपरा मानी जाती है।
- दही और छाछ का सेवन भी कई परंपराओं में वर्जित माना गया है।
- किसी की निंदा, अपमान या विवाद से बचें।
- क्रोध और नकारात्मक व्यवहार से दूर रहें।
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान श्रद्धापूर्वक व्रत, पूजा, अभिषेक और दान-पुण्य करने से शिव कृपा प्राप्त होती है तथा सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

