सुल्तानपुर मस्जिद की अवैध ऊंची मीनारों को हटाने का काम शुरू

हरिद्वार : उत्तराखंड सरकार राज्य में अवैध निर्माण को लेकर लगातार सख्ती बरत रही है। तीर्थनगरी हरिद्वार जिले के सुल्तानपुर नगर पंचायत क्षेत्र में निर्माणाधीन मस्जिद की अनधिकृत व अवैध रूप से बनी ऊंची मीनारों को हटाने का काम शुरू हो गया है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2020 में पुरानी जामा मस्जिद की जगह नई और बड़ी मस्जिद के निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। वर्ष 2025 में मस्जिद की मीनार की ऊंचाई को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें निर्धारित सीमा से अधिक ऊंचाई होने का दावा किया गया था। मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जांच के निर्देश दिए थे। जांच में मस्जिद और ऊंची मीनारों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया और न ही इसके निर्माण के लिए जिला प्रशासन अथवा प्राधिकरण से कोई अनुमति ली गई थी। तब डीएम हरिद्वार ने इसके निर्माण पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया था।

जांच में सामने आया कि सुल्तानपुर की इस मस्जिद के निर्माण से पूर्व इसका नक्शा पास नहीं करवाया गया और फायर सेफ्टी व लोक निर्माण सहित अन्य किसी विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं लिया गया। बावजूद इसके, नियमों को ताक पर रखकर मस्जिद में 250 फीट ऊंची मीनारें खड़ी कर दी गईं। बताया गया कि इस मस्जिद को राज्य की सबसे बड़ी मस्जिद बताकर धन संग्रह किया गया है। विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2009 और 2016 के निर्देशों के अनुसार, कोई भी धार्मिक भवन या संरचना बिना जिला अधिकारी की अनुमति के नहीं बनाई जा सकती।

सुल्तानपुर मस्जिद निर्माण को लेकर हरिद्वार के डीएम मयूर दीक्षित का कहना है कि बीते अक्टूबर में यह विषय संज्ञान में आने पर नोटिस देकर निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था। अब मस्जिद कमेटी ने स्वयं मीनारों को हटाने का प्रस्ताव दिया, जिसे प्रशासन ने स्वीकृति दे दी है। मीनारों की अत्यधिक ऊंचाई को देखते हुए उन्हें मैन्युअली (हाथों से) ही हटाया जा रहा है, क्योंकि मशीनों के प्रयोग से दुर्घटना का भय है। फिलहाल लक्सर एसडीएम अनिल शुक्ला मीनारों को हटाने के कार्य की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में 722 से अधिक मस्जिदों का निर्माण हो चुका है, जिनमें सबसे ज्यादा 322 मस्जिदें अकेले हरिद्वार जिले में हैं। इसके अलावा देहरादून जिले में 155, उधमसिंह नगर में 144 और नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें हैं। जांच में सामने आया है कि अधिकांश मस्जिदों के निर्माण संबंधी वैध अनुमति नहीं ली गई है, क्योंकि अनुमति के लिए आवश्यक भूमि दस्तावेज, संस्था पंजीकरण और आय-व्यय का ब्यौरा प्रबंधकों के पास नहीं है। इनमें से कई इमारतें सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाई गई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *