धनबाद। कतरास के छाताबाद स्थित आकाश किनारी मैदान में शुक्रवार देर रात हुए भीषण भू-धंसान से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में करीब 20 से अधिक घर जमीन में समा गए। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला। कई लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा है। घटना स्थल का मंजर देखकर लोगों की रूह कांप गई।
गौरतलब है कि पिछले महीने 7 जुलाई को भी इसी इलाके में भू-धंसान की घटना हुई थी, जिसमें चार से पांच घर प्रभावित हुए थे। ठीक एक महीने बाद 7 अगस्त को फिर उसी क्षेत्र में जमीन धंसने से लोगों में भारी दहशत फैल गई है।
युद्ध स्तर पर शुरू हुआ राहत कार्य
घटना की सूचना मिलते ही धनबाद के महापौर संजीव सिंह, उपमहापौर अरुण चौहान, महाप्रबंधक सत्यग्राम आनंद, बाघमारा अंचल अधिकारी गिरजानंद किस्कू, बीजेकेएमएस के महामंत्री रणविजय सिंह, पार्षद मोहम्मद शाहबुद्दीन, निरुपमा देवी, पूर्व पार्षद मासूम खान सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर पहुंचे। सभी ने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कराया।
महापौर संजीव सिंह ने बताया कि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण जनरेटर के माध्यम से अस्थायी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने गोविंदपुर क्षेत्र संख्या-3 के महाप्रबंधक सत्यग्राम आनंद से तत्काल राहत कार्य शुरू कराने को कहा। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार सुबह से व्यापक बचाव अभियान चलाया जाएगा।
कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर
स्थानीय लोगों की मदद से छह से सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की सूचना है। भू-धंसान की चपेट में आए घरों का लगभग पूरा सामान जमीन के नीचे दब गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास अब न रहने की जगह बची है और न ही रोजमर्रा का जरूरी सामान। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हो गए हैं।
अवैध खनन और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भी फूट पड़ा। लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में लगातार भू-धंसान की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जा रही है। उन्होंने प्रबंधन और अवैध खनन को इस हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया। प्रभावित परिवारों ने सुरक्षित पुनर्वास, तत्काल राहत और उचित मुआवजे की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी आबादी को अस्थायी रूप से दूसरी जगह बसाना आसान नहीं होगा। समाचार लिखे जाने तक पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील था। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है और किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।


