- पेंशनभोगियों और राज्य कर्मियों का महंगाई भत्ता बढ़कर हुआ 60 प्रतिशत
- 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती के प्रमाणीकरण हेतु ₹3.70 अरब स्वीकृत
- पेट्रोल-डीजल और शराब व्यवसायियों को मिली त्रैमासिक विवरणी (रिटर्न) दाखिल करने से मुक्ति
रांची : झारखंड सरकार की कैबिनेट (मंत्रिमंडल) की उच्च स्तरीय बैठक में राज्य के विकास और लोक कल्याण से जुड़े कुल 39 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर गहन विमर्श कर उन्हें प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकारी कर्मचारियों व पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के ऐतिहासिक विस्तार, जैविक कृषि, पशुपालन, कौशल विकास तथा प्रशासनिक व न्यायिक सुधारों से जुड़े कई दूरगामी फैसले लिए गए।
महंगाई भत्ते और राहत में हुई बंपर बढ़ोतरी
कैबिनेट ने सातवें केंद्रीय वेतनमान के अंतर्गत आने वाले सभी राज्य कर्मियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, छठे वेतनमान के तहत इसे 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत और पांचवें वेतनमान के दायरे में आने वाले कर्मियों के लिए 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘अबुआ दवाखाना’ को हरी झंडी, भत्तों में संशोधन
राज्य के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने ‘अबुआ दवाखाना योजना’ को मंजूरी दी है। इन नवनिर्मित केंद्रों में मरीजों को एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा चिकित्सा पद्धतियों से एक ही छत के नीचे इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (स्वास्थ्य आधारभूत संरचना मिशन) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की कार्य अवधि को 30 सितंबर 2026 तक विस्तारित किया गया है। चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न्स की छात्रवृत्ति (वृत्तिका) में भी वृद्धि की गई है।
जैविक कृषि के लिए ₹3.70 अरब मंजूर, मादक पदार्थों की सूचना देने पर इनाम
कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राज्य के 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती के प्रमाणीकरण की वृहद योजना को स्वीकृति दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक तीन चरणों में लागू होने वाली इस योजना पर कुल 3 अरब 70 करोड़ 12 लाख 500 रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और उत्पादन की सटीक सूचना देने वाले आम नागरिकों और स्तर-13 (लेवल-13) तक के सरकारी कर्मचारियों के लिए नई पुरस्कार नीति स्वीकृत की गई है, जिसके तहत 3,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये से अधिक तक का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
विस्थापितों की स्टांप ड्यूटी माफ, सुगम व्यापार के लिए नियमों का सरलीकरण
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (सुगम व्यापार) को बढ़ावा देते हुए सरकार ने राज्य के पेट्रोल, डीजल और शराब के खुदरा विक्रेताओं को त्रैमासिक रिटर्न (त्रैमासिक विवरणी) और मासिक एब्सट्रैक्ट (मासिक सार) दाखिल करने की बाध्यता से पूर्णतः मुक्त कर दिया है, क्योंकि इन वस्तुओं पर मूल्य वर्धित कर (वैट) का भुगतान खरीद के समय ही हो जाता है। एक अन्य संवेदनशील फैसले में पुनर्वास नीति के तहत विस्थापितों को आवंटित भूमि और सार्वजनिक उपयोग के लिए दान की गई जमीनों के दस्तावेजों पर स्टांप ड्यूटी (मुद्रांक शुल्क) और निबंधन शुल्क को पूरी तरह माफ कर दिया गया है।
कलाकारों की पेंशन हुई सरल, दुमका से उड़ान और न्यायालयों में नए पद
कैबिनेट ने 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और दिव्यांग कलाकारों को मिलने वाली 4,000 रुपये की मासिक निवृत्तिका योजना को बेहद सरल बना दिया है। अब इसके लिए कलाकार की मासिक आय 8,000 रुपये से कम होना अनिवार्य होगा।
दुमका हवाई अड्डे से नियमित विमान सेवा शुरू करने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के साथ अनुबंध को मंजूरी दी गई है। न्यायिक सुधार के तहत गिरिडीह के बगोदर-सरिया अनुमंडल न्यायालय के लिए 20 और पश्चिम सिंहभूम के चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालय के लिए 41 नए पदों के सृजन को स्वीकृति दी गई है। साथ ही पंचायती राज व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए पांचवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में 244.80 करोड़ रुपये जिला परिषदों के खातों में हस्तांतरित किए जाएंगे।
