जमशेदपुर : झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री सह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दुलाल भुइँया ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा किए गए पुतला दहन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने विपक्षी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि गृहमंत्री द्वारा प्रयोग किए गए “वनवासी” शब्द का गलत और भ्रामक अर्थ निकालकर कुछ राजनीतिक लोग समाज में अनावश्यक भ्रम, वैमनस्य और घृणा फैलाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, जो पूरी तरह से दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
शब्दों को राजनीतिक चश्मे से देखना बंद करे कांग्रेस
शुक्रवार को जारी अपने बयान में दुलाल भुइँया ने स्पष्ट किया कि वनवासी और आदिवासी दोनों ही शब्द हमारी गौरवशाली भारतीय समाज एवं संस्कृति के अभिन्न अंग और पहचान हैं। इन शब्दों को संकीर्ण राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय इनके गहरे ऐतिहासिक, पारंपरिक और सामाजिक महत्व को समझने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने दोनों शब्दों की व्याख्या करते हुए कहा कि वनवासी शब्द मूलतः उन समुदायों के लिए आदरपूर्वक प्रयोग किया जाता रहा है, जिनका संपूर्ण जीवन वन, प्रकृति और प्राचीन परंपराओं से गहराई से जुड़ा है, जबकि आदिवासी शब्द यहाँ के मूल निवासियों की ऐतिहासिक पहचान को रेखांकित करता है। दोनों ही शब्दों का मूल उद्देश्य इस समाज के त्याग, सम्मान और गौरव को प्रकट करना है, न कि किसी की भावनाओं को आहत करना।
मोदी सरकार में जनजातीय समाज को मिल रहा है वास्तविक सम्मान
पूर्व मंत्री ने देश की समृद्ध जनजातीय धरोहर की सराहना करते हुए कहा कि आदिवासी समाज ने सदियों से प्रकृति संरक्षण, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने केंद्र की वर्तमान नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा देश के आदिवासी समाज के समग्र विकास, उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और उनके वास्तविक सम्मान के लिए धरातल पर लगातार ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं।
आदिवासियों को भड़काकर स्वार्थ सिद्ध करने की राजनीति बंद हो
दुलाल भुइँया ने कांग्रेस नेताओं और उनके सहयोगी दलों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि महज तात्कालिक राजनीतिक लाभ और वोट बैंक के लिए शब्दों को तोड़-मरोड़ कर जनता के सामने प्रस्तुत करना कतई उचित नहीं है। कांग्रेस हमेशा से आदिवासियों को भड़का कर अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करती आई है, जिससे समाज में अनावश्यक विवाद पैदा होता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जनजातीय समाज को बांटने और आपस में लड़ाने की यह नकारात्मक राजनीति अब तुरंत बंद होनी चाहिए। झारखंड की पवित्र धरती हमेशा से महान आदिवासी वीरों, बलिदानियों और अटूट सामाजिक समरसता की भूमि रही है, इसलिए यहाँ किसी भी शब्द को लेकर विवाद खड़ा कर आपसी भाईचारे को बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।
