रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में खान एवं भू-तत्व तथा भवन निर्माण विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में अवैध खनन और बालू के अवैध उठाव पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे कार्यों से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है और पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित होता है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को समन्वित कार्रवाई, नियमित निगरानी और कानूनी उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की खनन गतिविधियों, लंबित परियोजनाओं और निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि जनता के हित से जुड़े किसी भी विकास कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बंद खदानों पर कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री ने बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल की बंद पड़ी खदानों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन खदानों में उत्पादन बंद है, वहां जल्द उत्पादन शुरू कराया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो संबंधित खदानों की लीज रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। साथ ही जिन खनिज ब्लॉकों की नीलामी हो चुकी है लेकिन वहां अब तक कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है, उन्हें निरस्त कर पुनः नीलामी की कार्रवाई की जाए।
स्वर्ण उत्पादन बढ़ाने पर जोर
समीक्षा के दौरान राज्य की सात स्वर्ण खदानों की प्रगति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तकनीकी उन्नयन और वैज्ञानिक तरीकों के माध्यम से वर्तमान स्वर्ण उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही नए संभावित स्वर्ण भंडारों की पहचान कर उनकी नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा।
खनन निगमों को मजबूत बनाने की पहल
मुख्यमंत्री ने झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (जेएसएमडीसी) और झारखंड माइनिंग एंड एक्सप्लोरेशन कंपनी लिमिटेड (जेएमईसीएल) को मजबूत बनाने के लिए अधिक खनिज क्षेत्रों को आरक्षित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और खनन गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
उन्होंने जेएमईसीएल में रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति करने और संस्थाओं के कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने को भी कहा। इसके अलावा पन्ना (इमराल्ड) खनिज ब्लॉकों को सरकारी उपक्रमों के लिए सुरक्षित रखने संबंधी प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया।
बालू घाटों के संचालन में तेजी लाने के निर्देश
राज्य के 820 बालू घाटों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि बड़ी संख्या में घाटों का आवंटन हो चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवंटित घाटों से जल्द बालू उठाव शुरू कराया जाए, ताकि निर्माण कार्यों में बाधा न आए। साथ ही मशीनों से बालू उठाव पर लगी रोक की कानूनी स्थिति की समीक्षा करने को भी कहा।
छात्रावासों में कोयला आपूर्ति की योजना बनेगी
बैठक में मुख्यमंत्री ने सरकारी एवं आवासीय विद्यालयों के छात्रावासों में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष योजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जहां एलपीजी की उपलब्धता में समस्या है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार की जाए।
निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयसीमा पर जोर
भवन निर्माण विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निर्माणाधीन सभी सरकारी भवनों, कार्यालय परिसरों, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण में गुणवत्ता और पारदर्शिता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने आधुनिक तकनीकों के उपयोग और नियमित तकनीकी निरीक्षण के माध्यम से परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव अरवा राजकमल, खान निदेशक राहुल कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
